जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ। इस दौरान सदन में पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का विधेयक पेश किया गया, जिस पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की ओर इशारा करते हुए मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की।

उमर अब्दुल्ला ने पूर्व विधायकों की पेंशन में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी का विधेयक सदन में पेश किया। उस समय फारूक अब्दुल्ला वीआईपी गैलरी में बैठकर कार्यवाही देख रहे थे। उमर ने कहा, “अब आज मेरे लिए घर वापस जाना आसान होगा।” इस पर फारूक अब्दुल्ला हंस पड़े और खुद की ओर इशारा किया।

उमर ने आगे कहा, “मेरे घर में एक पूर्व विधायक हैं।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन के कई सदस्य, जिनमें बीजेपी विधायक भी शामिल थे, हंस पड़े। बीजेपी विधायकों ने पेंशन बढ़ाने का विरोध नहीं किया।

राज्य के दर्जे के प्रस्ताव पर सदन में हंगामा

इससे पहले मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत ही हंगामे के साथ हुई। बीजेपी विधायकों ने सोमवार को ध्वनिमत से पारित राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। बीजेपी सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से कुर्सी छोड़ने की मांग करते हुए नारे लगाए।

इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक भी खड़े हो गए और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने बीजेपी नेताओं को ‘वोट चोर’ कहा।

बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष के बीच भी तीखी बहस हुई। सात बार विधायक रह चुके अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें कानून की जानकारी है और उन्हें कानून सिखाने की जरूरत नहीं है।

इसके बाद जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, बीजेपी विधायक सदन से बाहर चले गए। इस दौरान उन्होंने ‘भारत माता की जय’ और ‘स्पीकर साहिब, कुर्सी छोड़ो’ के नारे लगाए।

Legislative Assembly Row
राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान BJP ने J&K विधानसभा से वॉकआउट किया। (Express Photo by Shuaib Masoodi)

विधायकों की सैलरी बढ़ाने वाला बिल वापस लिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा सदस्यों के वेतन में बढ़ोतरी से जुड़ा प्रस्ताव भी पेश किया था। एक अलग विधेयक के जरिए पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया।

विधायकों की एक समिति ने वेतन को 1.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। इसमें भत्ते, टेलीफोन बिल और आवास ऋण जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं। हालांकि, सरकार की ओर से पेश विधेयक में वेतन में 35,000 रुपये की बढ़ोतरी का प्रस्ताव था।

बीजेपी विधायकों ने वेतन बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतन कर्मचारियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अभी भी लंबित हैं और ऐसे समय में विधायकों की सैलरी बढ़ाना उचित नहीं है।

इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने वेतन बढ़ाने वाला विधेयक वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह खुद भी वेतन बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से इसकी मांग की गई थी। उमर ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सभी विधायक सहमत होंगे तभी बिल आगे बढ़ाया जाएगा और एक भी विधायक के विरोध करने पर वह इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।

देवयानी राणा के सवाल पर भी हुआ विवाद

विधानसभा में बीजेपी विधायक देवयानी राणा के एक सवाल को लेकर भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और विपक्षी सदस्यों के बीच स्थिति गरमा गई। उमर के जवाब के बाद देवयानी राणा अनुपूरक सवाल पूछने के लिए खड़ी हुईं।

हालांकि, उनके सवाल पूछने के बजाय भाषण देने की कोशिश करने पर एनसी विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्ति जताई। जब वह बोलती रहीं तो अध्यक्ष ने किसी अन्य सदस्य को सवाल पूछने के लिए कह दिया।

इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि देवयानी राणा सदन में नई हैं और उन्हें विधानसभा के नियमों की जानकारी नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन्हें सदन के नियमों के बारे में बताएंगे। देवयानी राणा के पिता देवेंद्र सिंह राणा कभी उमर अब्दुल्ला के करीबी सहयोगी रहे थे। बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर के न्यूयॉर्क में सीमा पार आतंकवाद को लेकर दिए बयान पर विदेश मंत्रालय ने भारत का रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जयशंकर ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद को बड़ी चिंता का विषय बताया है और इससे निपटने के लिए देशों के साथ आने की जरूरत पर जोर दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।