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भारत के मुस्लिम संगठन ने पारित किया रिजॉल्यूशन, कश्मीर को बताया देश का अभिन्न हिस्सा, पाकिस्तान को नसीहत

महमूद मदनी ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को मुस्लिम विरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। हम पाकिस्तान के इस कृत्य की आलोचना करते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: September 12, 2019 1:47 PM
मदनी ने कहा कि भारत हमारा देश और हम कश्मीर को लेकर देश के साथ खड़े हैं। (फोटोः एएनआई)

देश के मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कश्मीर को लेकर एक रिजॉल्यूशन पारित किया है। जमीयत की तरफ से पारित किए गए इस रिजॉल्यूशन में कश्मीर को देश का अभिन्न् हिस्सा बताया गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी ने कहा कि हमने एक रिजॉल्यूशन पारित कर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया है।

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। भारत हमारा देश है और हम इसके साथ खड़े हैं। मदनी ने पाकिस्तान की भी आलोचना की। महमूद मदनी ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को मुस्लिम विरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। हम पाकिस्तान के इस कृत्य की आलोचना करते हैं।

मालूम हो कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् की बैठक में मंगलवार को अपील की थी वे भारत से जम्मू-कश्मीर में लागू किए गए प्रतिबंध हटाने को कहे। कुरैशी का कहना था कि भारत की तरफ से कश्मीर में कथित तौर पर मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है। भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म कर कश्मीर के लोगों को उनके घरों में कैद कर दिया है।

कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के प्रयोग पर रोक लगाने की भी मांग की थी। पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर में मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को भी जाने देने की मांग की गई। पाकिस्तान की इन झूठे आरोपों का भारत ने दमदार तरीके से जवाब दिया। भारत ने कश्मीर को देश का आंतरिक मामला बताते हुए पाकिस्तान के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि कश्मीर में जो पाबंदियां लगाई गई हैं वो एहतियातन हैं जिनमें धीरे-धीरे ढील दी जा रही है।

विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) विजय ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रशासन जरूरी समानों की आपूर्ति जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए वैधानिक उपायों के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमारे नागरिकों के लिए पूरी तरह से लागू होंगी। उन्होंने कहा कि इससे जेंडर का भेदभाव खत्म होगा। इससे किशोरों के अधिकारों की बेहतर रक्षा होगी और शिक्षा और सूचना व काम के अधिकार लागू होंगे।

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