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महिलाओं को बराबरी देना है तो मर्द भी साढ़े चार महीने तक गर्भ रखें- मुस्लिम धर्मगुरु

महाराष्ट्र के जमीयत उलेमा के सेक्रेटरी ने केन्द्र के इस प्रस्ताव को अटपटा बताया है और कहा है कि महिलाओं और पुरुषों को बराबर करने का फैसला बेकार है और ऐसा हो ही नहीं सकता है।
महिलाओं को अकेले हज पर भेजने के प्रस्ताव पर जमीयत उलमा ने आपत्ति जताई है। (फोटो-एएनआई)

नयी हज नीति के मुताबिक केन्द्र सरकार 45 साल से अधिक उम्र की मुस्लिम महिलाओं को अकेले हज पर भेजने का विचार कर रही है। लेकिन कई मुस्लिम धर्मगुरुओं को नरेंद्र मोदी सरकार का ये प्रस्ताव पसंद नहीं आ रहा है। महाराष्ट्र के जमीयत उलेमा के सेक्रेटरी ने केन्द्र के इस प्रस्ताव को अटपटा बताया है और कहा है कि महिलाओं और पुरुषों को बराबर करने का फैसला बेकार है और ऐसा हो ही नहीं सकता है। इस मुस्लिम धर्मगुरु के मुताबिक अगर पुरुष महिलाओं को अपनी बराबरी में लाना चाहते हैं तो वे साढ़े चार महीने तक बच्चे को अपने पेट में क्यों नहीं पालते? मौलाना ने कहा, ‘यदि आप समानता चाहते हैं तो मर्द और और औरत साढ़े चार चार महीनों तक गर्भधारण क्यों नहीं करते हैं।’ बता दें कि बरेली स्थित सुन्नी बरेलवी ने इस भी सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया है।

केन्द्र सरकार ने शनिवार (7 अक्टूबर) को नई हज नीति पेश की है। इस हज नीति में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए सब्सिडी की व्यवस्था खत्म करने और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत देने का प्रस्ताव किया गया है। बता दें कि मेहरम उस मुस्लिम पुरुष शख्स को कहते हैं जिससे मुस्लिम महिला का निकाह नहीं हो सकता। मसलन, पिता, सगा भाई, बेटा और पौत्र-नवासा मेहरम हो सकते हैं। हालांकि बिना मेहरम के हज पर जाने के लिए 4 महिलाओं का समूह होना जरूरी है। नयी हज नीति 2018-22 में हज यात्रियों को समुद्री मार्ग से भेजने के विकल्प पर काम करने की बात की गई है। समुद्री जहाज के जरिए हज पर जाना लोगों के लिए एक सस्ता विकल्प हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें यह प्रावधान किया गया है कि हज यात्रियों के प्रस्थान के स्थानों की संख्या को इक्कीस से घटाकर नौ किया जाएगा।

हज नीति तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से गठित समिति के संयोजक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अफजल अमानुल्लाह थे। पूर्व न्यायाधीश एस एस पार्कर, भारतीय हज समिति के पूर्व अध्यक्ष कैसर शमीम और इस्लामी जानकार कमाल फारुकी सदस्य थे तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में हज प्रभारी संयुक्त सचिव जे. आलम समिति के सदस्य सचिव थे। इस कमिटी ने केंद्रीय माइनॉरिटी अफेयर्स मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को यह प्रस्ताव दिया है।

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