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मॉब लिंचिंग के मद्देनजर जमीयत की मुस्लिमों से अपील- ‘सफेद’ मवेशियों की न दें कुर्बानी

एडवाइजरी में आगे कहा गया कि इस्लाम के अनुसार, काले जानवरों का बलिदान वैध है और इसलिए मुसलमानों को किसी भी सफेद जानवर की कुर्बानी देने से बचना चाहिए।

Maulana Mahmood Madaniजमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी।

इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार बकरीद सोमवार (12 जुलाई, 2019) को है। ऐसे में भारतीय मुस्लिमों के सबसे बड़े धार्मिक संगठनों में से एक जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। इसमें मुस्लिम समुदाय से अपील की गई है कि सफेद मवेशियों की कुर्बानी देने से बचें।

गाय का नाम लिए बगैर मुस्लिम समुदाय से एडवाइजरी में कहा गया कि वो सिर्फ काले जानवरों (यहां बकरियों और भैंस का संदर्भ समझें) की कुर्बानी दें। बता दें कि देश के अलग-अलग राज्यों से मॉब लिंचिंग की घटनाओं के चलते यह एडवाइजरी जारी की गई है।

मामले में जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अगर कोई बदमाश उन्हें बकरी की ‘कुर्बानी’ करने से रोकने की कोशिश करता है, तो वो शांत रहें। उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति में, अपने समुदाय के सुविचारित और सम्मानित लोगों को शामिल करें और प्रशासन के समक्ष मामले को उठाएं।’

मदनी ने जारी नोट में एडवाइजरी जारी करने की वजह बताते हुए कहा, ‘यह एडवाइजरी पूरे भारत के मुस्लिमों के लिए है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों की स्थिति और घटनाओं के मद्देनजर है।’

मुस्लिम समुदाय को समझाते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई आपको वैध काले जानवर की कुर्बानी उक्त जगह करने से रोकता है तो आप नजदीकी जगह पर जाकर कुर्बानी कर सकते हैं जहां ऐसी कोई बात नहीं हो। एडवाइजरी में कहा गया, ‘हालांकि, अगर कोई ऐसा स्थान है जहां कुर्बानी होती है, लेकिन आपको अभी भी रोका जा रहा है, तो ऐसी घटनाओं को प्रशासन के ध्यान में लाया जाना चाहिए।’

एडवाइजरी में आगे कहा गया कि इस्लाम के अनुसार, काले जानवरों का बलिदान वैध है और इसलिए मुसलमानों को किसी भी सफेद जानवर की कुर्बानी देने से बचना चाहिए।

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