ताज़ा खबर
 

वीडियो: फ‍िरोज खान के व‍िरोध पर सुनें जाम‍िया में उर्दू के ह‍िंदू प्रोफेसर का ज्ञान

प्रोफेसर ने यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध पर तंज कसते हुए कहा, 'अगर मैं संस्कृत से सच्चा प्रेम करता हूं तो मुझे खुशी होनी चाहिए कि दूसरे धर्म के लोग भी संस्कृत की तरफ खिच रहें हैं।'

Author नई दिल्ली | Published on: November 22, 2019 9:26 PM
सोशल मीडिया में शेयर किए जा रहे वीडियो में हिंदू प्रोफेसर ने आगे कहा कि कुछ लोग भटके हुए होते हैं। ऐसे में वो अक्सर गलती कर बैठते हैं। भाषा किसी धर्म की गुलाम नहीं है। हमारी संस्कृती रंगारंग है। ये हमें सिखाती है कि सभी धर्मों को एक जैसा समझें।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में संस्कृत के मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति पर उपजे बवाल पर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में उर्दू विभाग के हिंदू प्रोफेसर नारायण ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम प्रोफेसर की तैनाती पर छात्रों का विरोध नासमझी है। उन्हें इसके लिए समझाया जाना चाहिए। उन्होंने की अगर छात्र पढ़े-लिखे और यूनिवर्सिटी में ज्ञान हासिल करने के लिए आए हैं तो तीन बुनियादी चीजें उन्हें पता होनी चाहिए। प्रोफेसर ने कहा, ‘एक चीज है मजहब (धर्म), एक हैं तहजीब (संस्कृति), तीसरी है जबान यानी भाषा। ये तीनों ही एक दूसरे का इंटरफेस हैं। मगर ये तीनों एक दूसरे से आजाद भी हैं। भाषा का भी अपना आजाद अस्तित्व है। ऐसे ही धर्म और संस्कृति हैं।’

प्रोफेसर आगे कहते हैं, ‘तीनों में मुश्किल ये हैं कि लोग इनमें घालमेल कर देते हैं। लोग समझते हैं कि भाषा धर्म से आती है या धर्म से जुड़ी है। मगर भाषा का धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है। ये बहुत दुख की बात है कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में एक मुसलमान का विरोध हुआ है। वो भी संस्कृत पढ़ाने के लिए।’ प्रोफेसर ने यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध पर तंज कसते हुए कहा, ‘अगर मैं संस्कृत से सच्चा प्रेम करता हूं तो मुझे खुशी होनी चाहिए कि दूसरे धर्म के लोग भी संस्कृत की तरफ खिच रहें हैं।’

जामिया के प्रोफेसर ने संस्कृत के मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की तारीफ करते हुए कहा, ‘उन्होंने संस्कृत को दिल से चाहा होगा। जिसके चलते उसकी काबिलियत से लोगों ने उसके चुना। इसके लिए मैं चयनकर्ता और छात्रों को भी मुबारकबाद दूंगा। मैं चाहूंगा कि उन छात्रों को समझाया जाए और उन्हें स्नेह देते हुए बताया जाए कि इससे संस्कृत को ही लाभ होगा। छात्रों का ही लाभ होगा। ये देश की खुशनसीबी है, हमारी संस्कृति भेदभाव नहीं सिखाती।’

सोशल मीडिया में शेयर किए जा रहे वीडियो में हिंदू प्रोफेसर ने आगे कहा, ‘कुछ लोग भटके हुए होते हैं। ऐसे में वो अक्सर गलती कर बैठते हैं। भाषा किसी धर्म की गुलाम नहीं है। हमारी संस्कृती रंगारंग है। ये हमें सिखाती है कि सभी धर्मों को एक जैसा समझें। उन धर्मों से मोहब्बत करें। सभी भाषाओं को एक जैसा समझे। ये तो हमारी देश की खुशरंग फूल हैं। और इन सब फूलों को हम अपनी गोदी में भर लेंगे तो जो झगड़े-फसाद आए दिन होते रहते हैं। ऐसा नफरत की वजह से होता है। दुनिया में मोहब्बत से बड़ी चीज कोई नहीं है।’

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर नारायण को साल 1990 में पद्म श्री और साल 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 रामकृष्ण मिशन कॉलेज में नियुक्त मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर बोला- स्वामी जी कहते हैं धर्म से बड़ा मेरा ज्ञान
2 जिस आदिवासी दंपति की PM मोदी ने की थी तारीफ, लोगों ने उसे बस्ती से निकाला; दर-दर भटकने को मजबूर
3 ‘अर्थव्यवस्था पस्त, सरकार दिखा रही मुंगेरीलाल के हसीं सपने’, ट्वीट पर आशुतोष ट्रोल, लोग बोले- आप हैं वह मुंगेरीलाल, क्यों बन रहे हैं ज्ञानी?
जस्‍ट नाउ
X