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Jamia के छात्रों ने VC ऑफिस का किया घेराव, पूछा Delhi Police पर FIR होगा कब?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के नजदीक न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद चार सार्वजनिक बसों और दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई थी।

Author नई दिल्ली | January 13, 2020 5:12 PM
NEW DELHIजामिया में दिल्ली पुलिस के खिलाफ विरोध (फोटो सोर्स: ANI)

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने सोमवार (13 जनवरी) को वाइस चांसेलर नजमा अख्तर के कार्यालय का घेराव किया और पिछले महीने परिसर में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इसके अलावा छात्रों ने विश्वविद्यालय परीक्षाओं की तारीखों को नए सिरे से निर्धारित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। बता दें कि छात्र मुख्य द्वार का ताला तोड़कर कार्यालय परिसर में दाखिल हो गए और वीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया। मामले को शांत करने के लिए खुद वाइस चांसेलर को सामने आना पड़ा और बयान देना पड़ा।

घेराव के बाद वीसी ने दिया बयानः वीसी अख्तर ने छात्रों को समझाने की कोशिश की और कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश की गई लेकिन अब तक पंजीकृत नहीं हुई है। वीसी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष भी उठाया है और इस पर कानूनी राय भी मांगी है। उन्होंने आगे कहा कि घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा दोगुनी कर दी गई है।

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छात्रों ने लगाया आरोपः नाराज छात्रों ने दावा किया कि हिंसा के बाद उन्हे छात्रावास खाली करने का नोटिस दिया गया, जिससे वीसी ने इनकार किया है। मामले में सईद फहाद नामक छात्र ने कहा कि प्राथमिकी उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई जो प्रदर्शन के दौरान अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को रेखांकित करते हुए कहा कि असली गुनाहगार अभी भी बाहर हैं।

एक भी मामला नहीं हुआ है दर्ज- छात्रः इंजीनियरिंग के छात्र आदिल ने कहा कि पिछले महीने हुई हिंसा के मामले में एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर को प्रदर्शनकारियों ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के नजदीक न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद चार सार्वजनिक बसों और दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई थी। इस दौरान छात्रों, पुलिस और अग्निशमन दल के सदस्यों सहित कुल 60 लाख लोग घायल हुए थे।

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