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जामा मस्जिद के शाही इमाम के बेटे ने हिंदू लड़की से की शादी: रिपोर्ट

शाही इमाम के बेटे शाबान का वलीमा 14 नवंबर को होगा। इसमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पीएम नरेंद्र मोदी को भी न्‍योता भेजे जाने की खबर है।

शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी (बाएं) और बेटे शाबान की फाइल फोटो। फोटो क्रेडिट-इंडियन एक्‍सप्रेस

दिल्‍ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के बेटे और उनके उत्‍तराधिकारी शाबान ने रविवार को हिंदू गर्लफ्रेंड से शादी कर ली। लड़की उत्‍तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली है। दैनिक जागरण अखबार के अनुसार दोनों का निकाह जामा मस्जिद में पढ़ा गया। हालांकि, इमाम या उनके किसी रिश्‍तेदार की ओर से इस खबर पर कुछ नहीं कहा गया है। अक्‍तूबर में मीडिया में ऐसी खबर आई थी कि शाबान हिंदू लड़की से शादी करने वाले हैं। लेकिन शाही इमाम के करीबी लोगों ने तब मीडिया इंटरव्यू में इस खबर का खंडन किया था। दिल्ली की जामा मस्जिद के ऑफिस इंचार्ज अमानुल्लाह ने भी ऐसी खबरों को झूठ का पुलिंदा बताया था।

बताया गया है कि बुखारी ने शुरुआत में शादी का विरोध किया था, लेकिन जब लड़की इस्‍लाम कबूल करने को तैयार हो गई, तब उन्‍होंने रजामंदी दे दी। कहा जा रहा है कि लड़की ने शादी से पहले धर्मपरिवर्तन कर भी लिया है। शाबान ने 2 साल के अफेयर के बाद निकाह किया है।

बताया जा रहा है कि बेटे के दावत-ए-वलीमा में शाही इमाम केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पीएम मोदी को भी बुला रहे हैं। शाबान का वलीमा 14 नवंबर को होगा। शाबान की शादी में काफी लोगों को बुलाया गया था, लेकिन दोनों परिवारों में रस्‍साकशी की वजह से अधिकतर लोग खुद ही नहीं आए। अब वलीमा की जोरदार तैयारियां चल रही हैं, ताकि शादी में जो कमी रह गई, उसे पूरा किया जा सके।

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शाही इमाम ने पिछले साल 22 नवंबर को बेटे शाबान को अपना उत्‍तराधिकारी (शाही नायब इमाम) घोषित किया था। शाबान की दस्‍तारबंदी का कार्यक्रम नेशनल मीडिया में चर्चा का कारण बना था, क्‍योंकि उन्‍होंने पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री को न्‍योता भेजा था, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी को नहीं बुलाया था। इसकी वजह बताते हुए बुखारी ने कहा था, ‘देश के मुसलमान अब तक उनसे (मोदी से) जुड़ नहीं पाए हैं। पीएम को मुसलमानों में विश्वास जगाने के लिए आगे आना चाहिए।’

350 साल से भी पुरानी है शाही इमाम की परंपरा: जामा मस्जिद 1656 में तैयार हुई थी। 24 जुलाई 1656, दिन सोमवार ईद के मौके पर मस्जिद में पहली नमाज पढ़ी गई। नमाज के बाद इमाम गफूर शाह बुखारी को बादशाह की तरफ से भेजी गई खिलअत (लिबास और दोशाला) दी गई और शाही इमाम का खिताब दिया गया। तभी से शाही इमाम की यह रवायत बरकरार है।

दैनिक जागरण में छपी शाही इमाम बुखारी के बेटे शाबान की शादी की खबर। दैनिक जागरण में छपी शाही इमाम बुखारी के बेटे शाबान की शादी की खबर।

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