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नौसेना को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा जैश-ए-मोहम्मद, समंदर में आतंकियों को दे रहा ट्रेनिंग

आतंकी संगठन जैश ए माहम्मद भारतीय नौ सेना पर हमले की साजिश रच रहा है। इसके लिए एक समूह को पाकिस्तान के बहावलपुर में गहरे समुद्री तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

Author Updated: July 19, 2018 1:38 PM
भारतीय नौ सेना (Pic credit- Twitter)

जम्मू कश्मीर में सरकार और सेना की कार्रवाई से बौखलाकर आतंकी संगठन जैश ए माहम्मद फिर से नापाक हमले की साजिश रच रहा है। खुफिया चेतावनी के मुताबित जैश भारतीय नौसेना पर हमला करने की योजना बना रहा है। इसके लिए गहरे समुद्री गोताखोरों का उपयोग किया जा सकता है। जैश के आतंकियों को गहरे समुद्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे नौसेना के लड़ाकू जहाजों पर हमला कर सकें। नौसेना इस खुफिया चेतावनी को गंभीरता से ले रही है। एक खुफिया चेतावनी के मुताबिक, भारत के मल्टी एजेंसी सेंटर ने यह संकेत दिए हैं कि आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के एक समूह को पाकिस्तान के बहावलपुर में गहरे समुद्री तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है और वे नौसेना पर हमला करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने वहां डीप डाइविंग और स्विमिंग की ट्रेनिंग ली है। उनकी योजना भारत के नौसेना ठिकानों पर हमला कर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की है।

एनडीटीवी के अनुसार, जैश की इस साजिश से नौसेना की संपत्तियों को बड़ा खतरा है। हालांकि, अभी तह यह नहीं पता चल पाया है कि आतंकी किस युद्धपोत को निशान बनाएंगे। लेकिन बताया जा रहा है कि उनके निशाने पर नौसेना की सामरिक संपत्तियां हो सकती है। बैलिस्टिक मिसाइल की क्षमता वाली सबमरीन आईएनएस अरिहंत और आईएनएस हरिघाट पर भी खतरा हो सकता है। फिलहाल पनडुब्बियों और रूसी निर्मित परमाणु हमले पनडुब्बी आईएनएस चक्र दोनों विशाखापत्तनम में तैनात हैं। यह पनडुब्बी परमाणु हमला करने में भी सक्षम है। इस खतरे के मद्देनजर नौ सेना को अलर्ट कर दिया गया है।

नौसेना के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया है कि भारत के नौसेना के अड्डों और बंदरगाहों में बंदरगाहों के दृष्टिकोण पर तैनात सोनार सिस्टम के साथ एक बहु-स्तरित सुरक्षा ग्रिड है, जो विशेष रूप से गहरे समुद्री गोताखोरों का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही सुरक्षा के कई अन्य इंतजाम भी हैं। इनमें ऐसे सिस्टम हैं जो गहरे समुद्र में गोताखोरों की भी पहचान कर लेते हैं। बता दें कि वर्ष 2000 में यमन में अलकायदा के आतंकियों द्वारा यूएसएस कोल पर किए गए हमले में 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे।

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