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जगदीप धनखड़ बने देश के 14वें उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, पढ़ें 10 Points

Jagdeep dhankhar: राजस्थान के झुझुनूं जिले के रहने वाले जगदीप धनखड़ के पास उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की जिम्मेदारी थी। बीजेपी के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा दिया था।

जगदीप धनखड़ बने देश के 14वें उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, पढ़ें 10 Points
जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए(फोटो सोर्स: ANI)।

Vice president Jagdeep dhankhar: जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त की दोपहर 12.30 बजे राष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। बता दें कि शपथ से पहले जगदीप धनखड़ राजघाट पहुंते थे, वहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। शपथ समारोह के दौरान राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। पढ़ें 10 Points..

  • जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे और बीते 6 अगस्त को उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था।
  • इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे वहीं मार्गरेट अल्वा को 182 वोट हासिल हुए थे। उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 725 वोट डाले गए थे। इनमें 710 वोट वैध पाए गए। जबकि 15 वोट वैध नहीं मिले।
  • धनखड़ को 74.36 फीसदी मत हासिल हुए। 1997 के बाद से हुए पिछले छह उप-राष्ट्रपति चुनावों में धनखड़ की जीत का अंतर सबसे अधिक है।
  • राजस्थान के झुझुनूं जिले के रहने वाले जगदीप धनखड़ के पास उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की जिम्मेदारी थी। बीजेपी के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा दिया था।
  • पेशे से वकील धनखड़ किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता गोकुल चंद्र धनखड़ खेती करते थे।
  • साल 1990 में धनखड़ को राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का ओहदा मिला। 71 वर्षीय धनखड़ के पास राजस्थान उच्च न्यायालय और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने का अनुभव है। साल 1988 तक वह देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हो गए थे।
  • सक्रिय राजनीति में धनखड़ 1989 में आए और जनता दल के टिकट पर झुंझुनू से लोकसभा सांसद चुने गये।
  • 1990 में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में काम किया। राजनीति के शुरुआती दिनों में धनखड़ पूर्व उप प्रधान मंत्री देवी लाल से प्रभावित थे।
  • 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में धनखड़ को जनता दल ने टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें अजमेर के किशनगढ से टिकट दिया 1993 में चुनाव लड़कर वे विधायक बने।
  • वहीं 2003 में उनका कांग्रेस से भी मोहभंग हो गया और वे भाजपा में शामिल हो गए।

जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले धनखड़ 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए गए थे। वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव की घोषणा के बाद धनखड़ ने बीते 17 जुलाई को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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