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अध्यक्ष पद के लिए पहली पसंद नहीं थे जेपी नड्डा, ऐसे जीता अमित शाह का विश्वास, मोदी और आरएसएस से करीबी भी आया काम

बात 1998 की है। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को पार्टी ने महासचिव और राज्य का प्रभारी बनाकर भेजा था। मोदी और जेपी नड्डा ने मिलकार काम किया और चुनाव बाद पार्टी विधायकों की संख्या 9 से बढ़कर 31 हो गई।

Author Edited By रवि रंजन नई दिल्ली | Published on: January 21, 2020 11:20 AM
जेपी नड्डा को गुलदस्ता भेंट करते हुए नरेंद्र मोदी (Photo: PTI)

जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। हालांकि इस पद पर निर्वाचित होना उनके लिए आसान बात नहीं थी। वे अध्यक्ष पद के लिए पहली पसंद नहीं थे लेकिन अमित शाह का विश्वास जीतने में सफल रहे। नरेंद्र मोदी और आरएसएस का करीबी होना भी काम आया। बात 1998 की है। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को पार्टी ने महासचिव और राज्य का प्रभारी बनाकर भेजा। उस समय जेपी नड्डा राज्य में नेता प्रतिपक्ष थे। नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा ने मिलकार काम किया और चुनाव बाद पार्टी विधायकों की संख्या 9 से बढ़कर 31 हो गई।

भाजपा के सबसे सफल अध्यक्ष माने जाने वाले अमित शाह के बाद नड्डा को इस पद की जिम्मेवारी सौंपी गई है। इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें यकीन है कि नड्डा की अध्यक्षता में पार्टी नई ऊंचाइयों को छूएगी। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आरएसएस के पूर्व प्रचारक शाह की पहली पसंद नहीं थे। जो भी बात सामने आई है वह यह नहीं है कि सिर्फ मोदी ने नड्डा का समर्थन किया, बल्कि उनकी छवि प्रमुख व्यक्तियों की नजर में ‘सौम्य स्वभाव वाला व्यक्ति’ और ‘विश्वासी’ के रूप में है।

पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ काम करने के बाद नड्डा ने पिछले कुछ वर्षों में शाह के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है। पहले महासचिव के रूप में और बाद में कार्यकारी अध्यक्ष को तौर पर गृह मंत्री की योजनाओं को क्रियान्वित किया। शाह के मोदी कैबिनेट में शामिल होने के बाद नड्डा को जून में इस पद के लिए चुना गया था और तब से उन्होंने कभी भी अपनी सीमा का उल्लंघन नहीं किया। पार्टी के नेता बताते हैं कि भाजपा ने उन्हें जो भी भूमिका सौंपी है, उसमें उन्होंने पूरा किया है।

इससे पहले, नड्डा आरएसएस नेता और संयुक्त महासचिव सौदान सिंह के साथ मिलकर काम किया था। यह 2013 का समय था जब छत्तीगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान कमजोर स्थिति में पहुंची पार्टी को जीत दिलाने का काम किया। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत में रचनात्मक भूमिका निभाते हुए उन्हें मोदी द्वारा पुरस्कृत किया गया था। उन्हें स्वास्थ्य और परिवार मामलों का मंत्रालय दिया गया था।

नड्डा पटना विश्वविद्यालय में एक छात्र के रूप में एबीवीपी में शामिल हुए। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में नड्डा ने कानून की पढ़ाई करते हुए हिमाचल में एबीवीपी में आगे बढ़े। 1985 और 1989 के बीच इसके राष्ट्रीय महासचिव बने।

दिल्ली में एबीवीपी के संगठन सचिव के रूप में नड्डा ने फ्री थिंकर ग्रुप्स के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में छात्र नेताओं को तैयार किया। बाद में वह भाजयुमों में शामिल हो गए। इसके बाद राजनाथ सिंह से पदभार लेते हुए 1991-93 में उन्हें भाजयुमों का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। धीरे-धीरे वह भाजपा में शामिल हो गए।

1993 में उन्होंने हिमाचल से विधानसभा का चुनाव जीता। इसके अगले साल भाजपा के विधायक दल के नेता बनाए गए। 1998 में उन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया था। नड्डा ने तीन भाजपा अध्यक्षों, अमित शाह, गडकरी और राजनाथ के नेतृत्व में महासचिव के रूप में भी काम किया है।

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