J Jayalalitha Buried in Her favourite Green Sari At MGR memorial, Marina Beach will Full State Honour - शरीर ने आत्‍मा छोड़ दी, मगर जयललिता का हरे रंग से नाता नहीं टूटा - Jansatta
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जयललिता को हरा रंग बेहद पसंद था, अंतिम सफर पर भी वह उसी लिबास में थीं

विधानसभा चुनाव में विजयी होने के बाद जब जयललिता ने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्होंने हरी साड़ी पहनी थी।

Author December 6, 2016 8:41 PM
सोमवार (5 दिसंबर, 2016) की रात को जयललिता का निधन हो गया था। (पीटीआई फाइल फोटो)

उनकी आत्मा ने भले ही उनकी देह छोड़ दी, लेकिन अपने प्रिय हरे रंग से उनका नाता तब भी नहीं टूटा क्योंकि अंतिम सफर के समय भी जयललिता अपने पसंदीदा हरे रंग की साड़ी में थीं। जयललिता को हरा रंग बहुत पसंद था और वह हर महत्वपूर्ण मौके पर इस रंग का लिबास तो पहनती ही थीं, उनके आसपास की हर चीज में हरा रंग शामिल होता था। उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए आज तड़के जब उनके निवास पोएस गार्डन से उनका पार्थिव शरीर राजाजी हॉल ले जाया गया तो वह एक बार फिर अपनी ट्रेडमार्क हरी साड़ी में थीं, जिसका बोर्डर लाल था। विधानसभा चुनाव में विजयी होने के बाद जब जयललिता ने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्होंने हरी साड़ी पहनी थी। इसी तरह जब उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय से आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में बरी होने के उपरांत पिछले साल 23 मई को पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली तब भी वह हरे रंग की साड़ी पहने थीं। अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं के अनुसार हरा रंग जयललिता के लिए भाग्यशाली था और उन्हें बेहद पसंद था।

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटने के बाद जब वह सत्ता में लौटी थीं तब वह करीब आठ महीने में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने के दौरान भी वह अपने इसी पसंदीदा रंग की साड़ी पहने हुए थीं। जब उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय के सेंटेनरी आॅडिटोरियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब मंच के पीछे चमकीले हरे रंग की पृष्ठभूमि थी। राज्यपाल के रोसैया ने उन्हें जो गुलदस्ता भेंट किया उसमें भी बाहरी आवरण हरे रंग का था। पिछले साल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने हरे रंग की कलम से दस्तखत किए थे और उनकी अंगूठी में हरे रंग का नगीना जड़ा था।

तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की अंतिम यात्रा के लिए आर्मी ट्रक एवं गन कैरिज वाहन पर 40 श्रमिको ने 10 घंटे की मेहनत के बाद दो टन से अधिक फूल लगाकर इसे जनाजे के लिए तैयार किया। फूल दो तरह के थे। पहला सजावटी फूल जैसे शतावरी और गुलबहार और दूसरा, गुलाब एवं सफेद गेंदा जैसे पारंपरिक फूल। आर्मी ट्रक एवं गन-कैरिज को जनाजे के लिए तैयार करने के लिए बहुत जल्दी काम करने, मालाएं बनाने वाले कोयामबेदू मार्केट के एक वरिष्ठ फ्लोरिस्ट वेलु ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘इस गमगीन मौके के लिए फूलों की पसंद भी उसी के अनुसार होनी चाहिए थी क्योंकि ऐसा होना बहुत जरूरी होता है।’’

उन्होंने बताया कि मालाएं और अन्य सामान तैयार करने के लिए 2000 किलोग्राम से अधिक फूल इस्तेमाल किए गए। इन मालाओं का उपयोग आर्मी ट्रक, गन कैरेज और जयललिता के स्मारक स्थल पर किया गया। उन्होंने बताया कि बेंगलुरू समेत विभिन्न स्थानों से फूल मंगाए गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम 40 लोग आज सुबह तीन बजे से मालाएं तैयार करने, फूलों को जरूरी आकार देने आदि काम में जुटे रहे। ’’

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