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बंगाल चुनाव को कोरोना से जोड़ना ठीक नहीं- बोले थे शाह; अब BJP ने बदला रुख, कहा- मेगा रैलियां करना है खतरनाक

कोरोना के बीच रैलियों के सवाल पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि इन बातों का कोई मतलब नहीं है। बंगाल के साथ ही केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी और असम के भी चुनाव हो रहे थे लेकिन वहां कोरोना का सवाल नहीं उठा। ये सवाल बंगाल में ही सबसे ज्यादा है।

west bengal election, bjp, pm modi, amit shah, crowd in election rallyपश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करने जाते गृह मंत्री अमित शाह (फोटोः ट्विटर@riteshsingh013)

कोरोना ने हाहाकार मचाया तो बीजेपी की भी आंखें खुल गईं। पहले जहां गृहमंत्री अमित शाह कह रहे थे कि बंगाल चुनाव को कोरोना से जोड़ना ठीक नहीं। लेकिन अब हर तरफ चीख पुकार का मंजर देखकर पार्टी का सुर बदल गया है। बीजेपी ने अब ऐलान किया है कि चुनावी रैलियों में पांच सौ से ज्यादा लोग नहीं होंगे। वो रैली चाहें मोदी कर रहे हों या फिर कोई केंद्रीय मंत्री।

देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हो रहा है। चुनाव रैलियों को लेकर नेताओं की आलोचना भी हो रही है। कोरोना के बीच रैलियों के सवाल पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि इन बातों का कोई मतलब नहीं है। बंगाल के साथ ही केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी और असम के भी चुनाव हो रहे थे लेकिन वहां कोरोना का सवाल नहीं उठा। ये सवाल बंगाल में ही सबसे ज्यादा है।

अमित शाह ने कहा था, अगर राज्‍य सरकारों को लगता कि लॉकडाउन ही कोरोना की चेन तोड़ने का एकमात्र विकल्‍प है तो वह लॉकडाउन पर विचार कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा सिर्फ भारत की नहीं, अन्य देशों में भी कोविड की नई लहर है। दूसरे देशों में कोरोना के कारण जितना बड़ा नुकसान हुआ है उसकी तुलना में भारत की आबादी के हिसाब से हमने बेहतर काम किया है। देखा जाए तो शाह के बयान से साफ है कि उन्हें कोरोना की कोई फिक्र नहीं। उन्हें तो केवल इस बात का मलाल है कि लोग या विपक्ष बंगाल को लेकर ही सवाल क्यों उठा रहा है।

हालांकि, देश भर का नजारा देखा जाए तो कहने की जरूरत नहीं कि कोरोना ने लोगों को हलकान कर रखा है। संक्रमितों को अस्पताल में बिस्तर तक नहीं मिल रहे हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए उन्हें धक्के खाने पड़ रहे हैं। सिस्टम के फेल होने का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि खुद केंद्रीय मंत्री और जनरल वीके सिंह एक अदद बेड के लिए सोशल मीडिया पर गुहार लगाते दिखे। लेकिन बीजेपी की आंखें देर से खुल सकीं।

दो दिन पहले तक पीएम बंगाल में रैली की भीड़ को देख आत्ममुग्ध हो रहे थे। यहां तक कि उनके पास महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे का फोन उठाने का समय भी नहीं था। ठाकरे का कहना है कि जब उन्होंने पीएम को फोन किया तो जवाब मिला कि बंगाल से आएंगे तो बात करा दी जाएगी। मतलब, साफ है कि अंधेर नगरी चौपट राजा। लोग मौत के मुंह में हैं और जिन्हें उनको बचाने का इंतजाम करना है वो लोगों को फिर से वायदों का टॉनिक पिला रहे हैं।

गौरतलब है कि बंगाल में 6 लाख से ज्यादा कोविड केस सामने आ चुके हैं। 10,568 लोगों की मौत हो चुकी है। सीएम ममता बनर्जी कोविड की लहर को देख चुनाव आयोग से अपील कर रही हैं कि बाकी के फेज एक ही बार में निपटा दिए जाए। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आयोग से मांग की है कि बाकी के फेज स्थगित कर दिए जाए। लेकिन बीजेपी का कहना है कि वह अपने संवैधानिक दायित्व को निभा रही है। मोदी के नेतृत्व में देश ने पहले भी कई चुनौतियां झेली हैं। इस बार भी इससे पार हो जाएंगे।

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