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टूलकिट केसः भारत को बदनाम करने का था मंसूबा- DP बोली, वकील ने कहा- दिशा का खालिस्तान से नहीं कोई लेना-देना

पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि ये सिर्फ 'टूलकिट' का मामला नहीं था। ये देश को बदनाम करने की एक साजिश थी। पुलिस ने कहा कि ये उन तमाम वेबसाइट तक पहुंचने का जरिया है जो भारत और इसकी सेना को बदनाम करने के लिए बनाई गई हैं।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 20, 2021 5:49 PM
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टूलकिट मामले में गिरफ्तार हुईं दिशा रवि की जमानत याचिका पर शनिवार को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि ये सिर्फ ‘टूलकिट’ का मामला नहीं था। दिल्ली पुलिस ने कहा “वह खालिस्तान समर्थकों के साथ यह दस्तावेज (टूलकिट) तैयार कर रही थी। साथ ही, वह भारत को बदनाम करने और किसानों के प्रदर्शन की आड़ में देश में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश का हिस्सा थी।”

एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा की बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि यह महज एक ‘टूलकिट’ नहीं था। असली मंसूबा भारत को बदनाम करने और यहां अशांति पैदा करने की थी। उन्होंने कहा कि दिशा रवि ने व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत मिटा दी, क्योंकि वह कानूनी कार्रवाई से अवगत थी। इससे जाहिर होता है कि टूलकिट के पीछे नापाक मंसूबा था।

पुलिस ने दिल्ली की अदालत से कहा “दिशा रवि भारत को बदनाम करने, किसानों के प्रदर्शन की आड़ में अशांति पैदा करने की वैश्विक साजिश के भारतीय चैप्टर का हिस्सा थीं। पुलिस ने कहा “रवि टूलकिट तैयार करने और उसे साझा करने को लेकर खालिस्तान समर्थकों के संपर्क में थी।”

पटियाला हाउस कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से पूछा कि टूलकिल मामले में अभी तक आपने क्या सबूत जुटाए हैं। दिल्ली पुलिस ने जवाब देते हुए कहा कि जांच जारी है।

क्या होता है टूलकिट –

‘टूलकिट’ ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें किसी मुद्दे की जानकारी देने के लिए और उससे जुड़े कदम उठाने के लिए विस्तृत सुझाव दिये होते हैं। आमतौर पर किसी बड़े अभियान या आंदोलन के दौरान उसमें हिस्सा लेने वाले लोगों को इसमें दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसी खास वर्ग या लक्षित समूह को जमीनी स्तर पर गतिविधियों के लिए दिशानिर्देश देना होता है।

सुनवाई के दौरान दिशा रवि के अधिवक्ता ने कहा “दिशा रवि बिना किसी उद्देश्य के एक विद्रोही नहीं हैं, पर्यावरण और कृषि का उद्देश्य है, तथा दोनों के बीच एक संबंध है।” वकील ने कहा कि दिशा रवि का प्रतिबंधित संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ के साथ संबंध होने का कोई सबूत नहीं है। यदि ‘मैं’ किसी से मिलती भी हूं, तो उसपर कोई निशान नहीं लगा है कि वह पृथकतावादी है

बचाव पक्ष ने दिशा रवि की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही अदालत से कहा “किसानों के विरोध प्रदर्शन को वैश्विक रूप से रेखांकित करना राजद्रोह है, तो अच्छा है कि मैं जेल में रहूं। “वकील ने कहा कि प्राथमिकी में आरोप है कि योग और चाय को निशाना बनाया जा रहा है। क्या यह अपराध है।

उन्होंने कहा “लाल किला हिंसा मामले में गिरफ्तार किसी भी व्यक्ति ने यह नहीं कहा है कि वह टूलकिट से प्रेरित था। लगभग तीन घंटे की सुनवाई के बाद अदालत ने मंगलवार तक अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब मंगलवार को पता चल सकेगा कि दिशा रवि को जमानत मिलेगी या उन्हें जेल में रहना होगा।

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