ताज़ा खबर
 

सीख और सिद्धियां: चमत्कार की उम्मीद न करें साधना में

एक बहुत ही रोचक घटना है। प्रसिद्ध संत रामकृष्ण परमहंस ने एकदम शुरू में स्वामी विवेकानंद (तब वे नरेंद्र नाम से जाने जाते थे) से कहा- मेरे पास जितनी सिद्धियां हैं, वह सब मैं तुम्हें दे दूंगा। तो स्वामी विवेकानंद ने पूछा- क्या इन सिद्धियों से ईश्वर से मिलन हो जाएगा? रामकृष्ण परमहंस ने कहा-नहीं। तो स्वामी विवेकानंद ने कहा- 'तो फिर इन सिद्धियों को किसी दूसरे व्यक्ति को दे दीजिए। रामकृष्ण परमहंस जैसे उच्च कोटि के संत स्वामी विवेकानंद का उत्तर पहले से ही जानते थे। संतों की बातें अद्भुत होती हैं।

Author Published on: July 6, 2020 12:50 AM
Religion, Mantra powerयह सच है कि साधना में सफलतापूर्वक अग्रसर होने पर सिद्धियां मिलती हैं। इसे अनेक संतों ने कहा है। लेकिन उसके लिए गहरी साधना करनी होती है।

विनय बिहारी सिंह
एक कथा है- एक ऋषि के पुत्र किसी विख्यात साधक के आश्रम से शिक्षा पूरी कर घर लौटे। उनके पिता ने पूछा- तुम क्या सीख कर आए? पुत्र ने कहा- मैं पानी के ऊपर चल सकता हूं। पैदल ही नदी को पार कर सकता हूं। पिता ने कहा- मैं दो रुपए में नाव से नदी पार कर लेता हूं, तुमने इतने छोटे कार्य के लिए पांच वर्ष लगा दिए?

बेटा चकित हुआ। लोग उसका जिस बात के लिए आदर करते थे, उसे पिता ने तुच्छ बता दिया। पिता का दूसरा प्रश्न था- तुमने अपनी साधना के दौरान कभी भी ईश्वर को जाना? पुत्र ने कहा- नहीं। तो पिता ने कहा- तब तुम्हारी साधना व्यर्थ है। पिता का कहना था कि मनुष्य का जन्म ईश्वर को जानने के लिए होता है। पानी पर चल कर या कोई भी चमत्कार दिखाने के लिए नहीं।

यह कथा बहुत कुछ कहती है। अनेक लोग शुरू से ही चमत्कारों की आशा लेकर साधना शुरू करते हैं और जब कुछ नहीं होता तो साधना छोड़ देते हैं। इसीलिए मशहूर पुस्तक ‘योगी कथामृत’ (पुस्तक का मूल नाम- आटोबायोग्राफी आफ अ योगी) परमहंस योगानंद ने कहा है- साधना सर्कस नहीं है। मन और भावुकता को शांत, अचल करने पर ही ध्यान गहरा होता है।’ तो सबसे पहले मन को शांत करें।

यह सच है कि साधना में सफलतापूर्वक अग्रसर होने पर सिद्धियां मिलती हैं। इसे अनेक संतों ने कहा है। लेकिन उसके लिए गहरी साधना करनी होती है। जो साधक निर्विकल्प समाधि में दृढ़ता प्राप्त कर चुका है, उसे ही सिद्ध कहा जा सकता है। तब उसके पास सिद्धियां तो होती हैं, लेकिन वह उनको महत्त्वपूर्ण नहीं मानता।

एक बहुत ही रोचक घटना है। प्रसिद्ध संत रामकृष्ण परमहंस ने एकदम शुरू में स्वामी विवेकानंद (तब वे नरेंद्र नाम से जाने जाते थे) से कहा- मेरे पास जितनी सिद्धियां हैं, वह सब मैं तुम्हें दे दूंगा। तो स्वामी विवेकानंद ने पूछा- क्या इन सिद्धियों से ईश्वर से मिलन हो जाएगा? रामकृष्ण परमहंस ने कहा-नहीं। तो स्वामी विवेकानंद ने कहा- ‘तो फिर इन सिद्धियों को किसी दूसरे व्यक्ति को दे दीजिए। रामकृष्ण परमहंस जैसे उच्च कोटि के संत स्वामी विवेकानंद का उत्तर पहले से ही जानते थे। संतों की बातें अद्भुत होती हैं।

महत्वपूर्ण है साधना की निरंतरता और गहराई। भारी से भारी कष्ट या तनाव या परेशानी साधना से विचलित न कर पाए। मन का नियंत्रण न तोड़ पाए तो वह साधक सफल माना जाता है। कई लोग कहते हैं कि मन को नियंत्रण में कैसे लाएं। असंभव लगता है। यही बात भगवत गीता में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कही। तब भगवान ने उत्तर दिया- यह अभ्यास और वैराग्य से संभव है। वैराग्य का अर्थ सब कुछ छोड़ कर जंगल में जाना नहीं है। मन से जान लेना है कि यह संसार हमें सच्चा सुख और प्यार नहीं दे सकता। यहां सब कुछ क्षणभंगुर यानी अस्थायी है। असली सुख, आनंद और प्यार तो ईश्वर ही में मिलेगा।

भगवान ने दूसरा आवश्यक उपाय बताया है- अभ्यास। मन चाहे जितना इधर-उधर भागे, उसे खींच कर ईश्वर पर केंद्रित करना ही वह कला है, जिससे उस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। छल- प्रपंच और निंदा रस में डूबने वाले व्यक्ति के लिए साधना संभव नहीं है। इसीलिए बिना आजमाए ही अनेक लोग कह देते हैं- यह सब कहने की बातें हैं। कौन इतना करता है। कहना बहुत आसान है, कोई करे तो जानें। ऐसा कहने वाले वे लोग होते हैं जिन्होंने कुछ दिन ध्यान या जप किया और फिर पाया कि साधना के समय तो मन और ज्यादा चंचल हो जाता है। बस साधना छोड़ कर उसकी निंदा का बीड़ा उठा लेते हैं।

जो दृढ़ संकल्प लेकर साधना में उतरते हैं, वे सफल हुए हैं। आप भी सफल हो सकते हैं। दृढ़ता, निरंतरता और भक्ति के मिश्रण से साधना में निश्चित रूप से सफलता मिलती है। यह निश्चित है। हां, किसी चमत्कार या सिद्धि की बात मन से निकाल देनी होगी। परमहंस योगानंद की बात याद रखनी होगी- साधना, सर्कस नहीं है। गहरी शांति और स्थिरता में उतरिए और ध्यान का सुख पाइए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 तीज-त्योहार: खास है इस बार सावन का महीना
2 जब अटल जी ने सुनाया था नेहरू संग ‘घनिष्ठता’ का किस्सा, रामचंद्र गुहा ने शेयर किया पुराना VIDEO, वायरल
3 राष्ट्रवाद पर डिबेट में तस्लीम रहमानी की बात पर भड़के एंकर, दिया जवाब तो पैनलिस्ट ने बता दिया ‘कम्युनल बदतमीज’; कहा-ये आपके दिमाग की सड़ांध है
ये पढ़ा क्या?
X