तेजस्वी यादव बोले: ममता बनर्जी और चिराग को साथ लिए बगैर बीजेपी को हराना मुश्किल

बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 2024 की तैयारियों पर बात करते हुए कहा है कि कांग्रेस के बिना कोई विपक्षी मोर्चा नहीं हो सकता है, टीएमसी और चिराग पासवान का साथ भी जरूरी है। हमें ईगो छोड़कर एक साथ आना चाहिए।

tejashwi yadav, 2024 election
बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

राजद नेता और लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेस्जवी यादव ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि कांग्रेस के बिना कोई भी विपक्षी मोर्चा नहीं बन सकता है। टीएमसी, एसपी और एनसीपी को ईगो छोड़कर साथ आना चाहिए। साथ ही तेजस्वी ने कहा कि ममता बनर्जी और चिराग को साथ लिए बगैर बीजेपी को हराना मुश्किल होगा।

2024 में विपक्षी मोर्चे पर जब तेजस्वी से पूछा गया तो उनके एजेंडे में कांग्रेस सबसे ऊपर थी। तेजस्वी ने कहा- “लोगों को एक विकल्प चाहिए… कांग्रेस एक अखिल भारतीय पार्टी है। कांग्रेस के बिना विपक्ष एक साथ नहीं आ सकता।“

 

आगे तेजस्वी ने कहा कि अब काफी देर हो चुकी है और हमें इस बात की रणनीति बनानी शुरू कर देनी चाहिए कि हम लोगों तक कैसे पहुंचेंगे। मुद्दों की कोई कमी नहीं है,  लोगों को परेशानी हो रही है और वे चाहते हैं कि यह सरकार गिरे। लोग स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने गलत पार्टी को वोट दिया। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश के लिए एक विकल्प पेश करें। देश को बचाने के लिए सभी को एक साथ आना होगा, अपने अहंकार और मतभेदों को दूर रखना होगा। यदि आप क्षेत्रीय दलों को हटा दें, तो कम से कम 200 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला है, लेकिन जिन क्षेत्रों में क्षेत्रीय दल मजबूत हैं, उन्हें ड्राइविंग सीट पर बैठाया जाना चाहिए। इसके लिए समय आ गया है… अब क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखा जाना बाकी है।

 

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस इंटरव्यू में खुलकर हर मुद्दों पर जवाब दिया। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव पर बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि ये पहला चुनाव था जब उनके पिता लालू प्रसाद यादव शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं थे। उनकी पार्टी दुनिया के सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के सामने चुनाव लड़ रही थी, जिसके पास केंद्रीय मंत्रियों का लंबी फौज थी। जनता ने महागठबंधन को चुना था लेकिन आप कह सकते हैं कि चुनाव आयोग एनडीए के पक्ष में था।

कांग्रेस को इस चुनाव में 70 सीटें देने के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि हम जब गठबंधन बनाते हैं तो कोई एक पार्टी क रूप में नहीं लड़ते। हर पार्टी चाहती है कि वो ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े। आपको कुछ छोटे त्याग करने होते हैं, और बिहार में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, हमने वह किया और सभी को एक साथ लाया।

चिराग पासवान के सवाल पर तेजस्वी ने कहा “चिराग पासवान के साथ हमारे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं और मेरे पिता के भी दिवंगत रामविलास पासवान के साथ अच्छे संबंध थे। उन्होंने यूपीए-1 में साथ काम किया। मीडिया के माध्यम से भी हमने हमेशा कहा है कि चिराग पासवान को अपनी विचारधारा में और अधिक स्पष्ट होने की जरूरत है।“

नीतीश कुमार के साथ जाने के सवाल पर तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि आप उन पर भरोसा नहीं कर सकते। हमने उन्हें एक मौका दिया और उन्होंने वही किया जिसके लिए वह जाने जाते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्होंने फिर यू-टर्न लिया। उनकी बातों का कोई मूल्य नहीं है।

इंटरव्यू के अंत में तेजस्वी आगे की रणनीति और बंगाल चुनाव पर बात करते हुए कहते हैं कि बंगाल की जनता ने देश को एक अच्छा संदेश दिया है। यह दर्शाता है कि लोग धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं। उन्होंने इसके लिए वोट किया और ममता बनर्जी के काम के लिए। वहां भाजपा के प्रयास विफल रहे। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, शरद पवार जैसे क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं से हम समय-समय पर मिलते रहते हैं। सभी को देश की चिंता है। जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी। हमें अपने अहंकार और मतभेदों को दूर करने की जरूरत है,  कौन क्या पद प्राप्त करता है,  हमें इसे भूल जाना चाहिए। देश बचेगा तो हमें पद मिलेंगे। अगर वे (बीजेपी) कुछ और समय तक रहे, तो कोई देश नहीं होगा…

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