Budget 2026 News: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश किया। इसमें चालू वित्त वर्ष में जम्मू और कश्मीर के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन का प्रस्ताव है। हालांकि, यह बजट केंद्र शासित प्रदेश के व्यापारियों को संतुष्ट करने में विफल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पहलगाम हमले के बाद टूरिज्म सेक्टर में हुए नुकसान की भरपाई नहीं करता है।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए जम्मू-कश्मीर को 43290.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का प्रस्ताव रखा। यह चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान 41340.22 करोड़ रुपये से 1,959.07 करोड़ रुपये ज्यादा है। इस आवंटन में केंद्र शासित प्रदेश डिजास्टर रिस्पांस फंड के तौर पर 279 करोड़ रुपये, झेलम तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट के लिए इक्विटी के रूप में 259.25 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के समर्थन के लिए 101.77 करोड़ रुपये शामिल हैं।
बादल फटने से नुकसान हुआ- अरुण गुप्ता
जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों, होटल मालिकों और ट्रांसपोर्टरों सहित आम जनता को हुए नुकसान को देखते हुए यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। उन्होंने इस नुकसान का कारण पहलगाम आतंकी हमले के बाद टूरिस्टों का पलायन और सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुई झड़पों को बताया।
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उन्होंने आगे कहा कि लगातार बारिश, बादल फटने और बाढ़ से भी बहुत नुकसान हुआ है। गुप्ता ने कहा, “हालांकि केंद्रीय बजट में देश भर के सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखा गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लिए आवंटित राशि व्यापारियों, होटल मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य सहित आम जनता को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।”
जम्मू-कश्मीर की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहा बजट- राहुल सहाय
जम्मू-कश्मीर में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राहुल सहाय ने बजट क प्रगतिशील और देश के लिए टिकाऊ बताया, लेकिन कहा कि यह जम्मू-कश्मीर की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहा है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “बजट में सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस किया किया गया है और राष्ट्र के हिसाब से यह बहुत ही संतुलित लगता है, लेकिन क्षेत्र विशेष के नजरिये से उद्योगों के मामले में यह हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, खासकर यह देखते हुए कि जम्मू और कश्मीर एक संघर्ष क्षेत्र है।” उन्होंने कहा, “हमारी सबसे बड़ी अपेक्षा जम्मू और कश्मीर को लेकर थी, कि इसे थोड़ा और फंड मिलना चाहिए था।”
जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक कॉन्फ्रेंस के महासचिव काबला सिंह ने बजट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह असमानताओं को दूर करने के बजाय बड़े पूंजीपतियों, फाइनेंसियल मार्केट्स और प्राइवेट इंवेस्टर्स को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए सेंट्रल टैक्स का मौजूदा हिस्सा बरकरार रखकर वित्तीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। बजट को पूंजी-हितैषी और जनहितैषी न बताते हुए सिंह ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट से मजदूर, किसान और छोटे व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हैं। वित्त मंत्री के बजट भाषण की मुख्य बातें; जानें किस सेक्टर को क्या मिला
