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इसरो 29 मार्च को लॉन्च करेगी जीसैट-6ए उच्च शक्ति का एस-बैंड संचार उपग्रह

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत 29 मार्च को जीसैट-6ए के प्रक्षेपण के साथ यह वित्तवर्ष पूरा करेगा। जीसैट-6ए उच्च शक्ति का एस-बैंड संचार उपग्रह है।

Author बेंगलुरू | Updated: March 28, 2018 5:25 PM
(Photo Source- ISRO)

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत 29 मार्च को जीसैट-6ए के प्रक्षेपण के साथ यह वित्तवर्ष पूरा करेगा। जीसैट-6ए उच्च शक्ति का एस-बैंड संचार उपग्रह है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, दस साल के जीवन काल वाले इस उपग्रह को भारतीय रॉकेट जियोसिनक्रोनस उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-एफ08) द्वारा कक्षा में स्थापित किया जाएगा। रॉकेट के 29 मार्च को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा रॉकेट पोर्ट से शाम 4.56 बजे दूसरे लांच पैड से प्रक्षेपण की उम्मीद है।

इसरो ने कहा कि जीसैट-6 की तरह ही जीसैट-6ए है। यह उपग्रह विकसित प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिसमें 6एम एस-बैंड अनफ्लेरेबल एटीना, हैंडहेल्ड ग्राउंड टर्मिनल व नेटवर्क प्रबंधन प्रौद्योगिकी शामिल हैं। ये उपग्रह आधारित मोबाइल संचार अनुप्रयोगों में उपयोगी हैं। इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने आईएएनएस से कहा कि जीसैट-6ए के बाद एक नेविगेशन उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा, जो अगले वित्तवर्ष में लांच होगा।

आपको बता दें कि इंडियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिक आए दिन ही नए-नए कीर्तीमान गढ़ रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल यानी भेल) उसके लिए स्पेस ग्रेड का लीथियम आयन सेल्स यानी बैटरी बनाएगी। इसरो ने एक बयान में कहा, “हमने स्पेस ग्रेड लीथियम आयन सेल्स बनाने के लिए भेल के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का एक करार किया है।”

इसरो के अध्यक्ष के. सिवन और भेल के प्रबंध निदेशक अतुल सोबती ने कुछ दिन पहले यहां स्पेस एजेंसी के मुख्यालय में करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसरो ने बयान में कहा, “लीथियम आयन बैटरी का उपयोग हमारे उपग्रह और लांच व्हीकल के एप्लीकेशन में होता है क्योंकि इसमें उच्च ऊर्जा घनत्व व विश्वसनीयता होती है और यह लंबे समय तक चलती है।”

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने स्पेस ग्रेट लीथियम सेल्स बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित है। परीक्षण के तहत इसके कार्य का प्रदर्शन किया, जिसमें पाया गया कि इसकी सक्रियता का चक्र तीव्र है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से भेल अंतरिक्ष कार्यक्रम की जरूरतों की पूर्ति के लिए स्पेस ग्रेड लीथियम सेल्स बनाने में सक्षम होगा।
इसरो ने कहा, “इस प्रौद्योगिकी को अपनाकर देश की अन्य जरूरतों के लिए भी लीथियम सेल की आवश्यकतों की पूर्ति की जा सकती है।”

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