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‘राहु काल’ की वजह से ISRO ने नहीं शुरू किया चंद्रयान-2 का काउंटडाउन? 13 अंक से भी सहमे

हालांकि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग का रिहर्सल सफल रहा है और इसका काउंटडाउन रविवार शाम 6:43 से शुरू हो गया। के शिवन

Author नई दिल्ली | July 21, 2019 8:09 PM
पहले चंद्रयान-2 15 जुलाई को लॉन्च होने वाला था।(फोटो- इसरो)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन चांद पर भेजने के लिए अपने दूसरे यान के लिए तैयार है। हालांकि इसका काउंटडाउन अभी शुरू नहीं हुआ है। पहले यह 15 जुलाई 2019 को लॉन्च होने वाला था लेकिन तकनीकी खराबी के चलते ऐसा नहीं हो पाया था। इसरो के एक रिटायर्ड अधिकारी का कहना है कि इसरो भले ही रॉकेट और उपग्रह अंतरिक्ष में भेजता हो लेकिन इसरो के कुछ अपने अंधविश्वास और विश्वास हैं जिसके तहत इसरो अपने कार्यक्रम तय करता है। नाम ना बताने की शर्त के साथ उस अधिकारी ने एक न्यूज चैनल से बताया कि चंद्रयान-2 के काउंटडाउन की शुरुआत इसरो, राहु काल में नहीं करेगा। राहु काल के समय किसी काम को शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है।

इंटरप्लेनेटरी मिशन के दौरान शुभ समय और लॉन्चिंग टाइम मनमाफिक नहीं हो सकते हैं, क्योंकि यान को जिस ग्रह पर भेजना होता है उसकी स्थिति और समय के आधार पर ही लॉन्चिंग का समय तय किया जाता है। इसलिए काउंटडाउन की शुरुआत शुभ समय पर ही की जाएगी। इसी तरह रॉकेट मिशन से पहले इसरो के अधिकारी आंध्र प्रदेश के तिरुमाला के प्रख्यात वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा पाठ करते हैं और रॉकेट का मॉडल मंदिर में भगवान को चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं। बीते कुछ सालों में श्रीहरिकोटा रॉकेट पोर्ट के आस पास के कई मंदिरों को सूचीबद्ध किया गया है जहां इसरो के वैज्ञानिक अपने जूनियर्स को पूजा पाठ और मिशन के सफल होने की कामना करने के लिए भेजते हैं। इसके अलावा मिशन के अलग-अलग पड़ाव पर भी पूजा पाठ का आयोजन किया जाता है। इसरो के पूर्व चीफ ने बताया कि लॉन्चिंग के दिन प्रोजेक्ट डायरेक्टर नई शर्ट पहनते हैं।

13 का चक्कर: इसरो के वैज्ञानिकों ने अभी इस बात पर भी सफाई नहीं दी है कि पीएसएलवी-सी12 के बाद पीएसएलवी-सी13 की बजाए पीएसएलवी-सी14 क्यों डिजाइन किया गया है। पीएसएलवी-सी12 के बाद इसरो ने पीएसएलवी-सी14 का इस्तेमाल किया।इसरो के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि पीएसएलवी-सी13  नाम का कोई रॉकेट बनाया ही नहीं गया है। हालांकि अंक 13 को अशुभ मानने के सवाल पर उन्होंने इससे इंकार कर दिया।

गौरतलब है कि अपोलो-13 के असफल लॉन्च के बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने कभी इस नंबर के नाम से किसी मिशन की शुरुआत नहीं की।बता दें कि 450 करोड़ में मंगलयान भेजकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने नाम कमाया ही इसके साथ , इसरो ने मंगलवार को इस लॉन्च के साथ ही यह धारणा भी बदली कि मंगलवार का दिन अशुभ होता है।

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