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ISRO के नाम एक और उपलब्धि, इंग्‍लैंड के दो सैटेलाइट का प्रक्षेपण सफल

भारत के 'ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन' (पीएसएलवी) ने रविवार रात इंग्लैंड के 889 किलो वजनी दो विदेशी उपग्रहों- 'नोवाएसएआर' और 'एस1-4' को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

Author September 17, 2018 1:50 PM
भारत के ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन’ (पीएसएलवी) ने रविवार रात इंग्लैंड के 889 किलो वजनी दो विदेशी उपग्रहों- ‘नोवाएसएआर’ और ‘एस1-4’ को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

भारत के ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन’ (पीएसएलवी) ने रविवार रात इंग्लैंड के 889 किलो वजनी दो विदेशी उपग्रहों- ‘नोवाएसएआर’ और ‘एस1-4’ को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। 44.4 मीटर ऊंचा और 230.4 टन वजनी ‘पीएसएलवी-सीए’ (कोर अलोन) संस्करण वाला रॉकेट पहले ल़ांच पैड से रविवार रात 10.08 बजे प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण केंद्र पर दो लांच पैड हैं। ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (आईएसआरओ) के अनुसार, प्रक्षेपण के 17 मिनट और 44 सेकेंड बाद पृथ्वी पर नजर रखने वाले दो उपग्रह 583 किलोमीटर की परिधि में स्थापित हो गए। इसरो के अनुसार, दो पृथ्वी अवलोकन उपग्रह सूर्य के 583 किलोमीटर बड़े समकालिक कक्ष में लॉन्च किए गए।

445 किलोग्राम वजनी ‘नोवाएसएआर’ एक एस-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह है जो वन मानचित्रण, भूमि उपयोग, बर्फ, बाढ़ और आपदा की निगरानी करेगा। ‘एस1-4’ एक क्षई रेजेलूशन ऑप्टिकल अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह है, जो संसाधनों, पर्यावरण निगरानी, शहरी प्रबंधन और आपदा निगरानी के लिए उपयोग किया जाता है। यह दो उपग्रह इसरो की वाणिज्यिक शाखा – एंट्रिक्स कॉर्प लिमिटेड के साथ वाणिज्यिक व्यवस्था के तहत ब्रिटेन के ‘सरे सैटेलाइट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ (एसएसटीएल) के हैं।
इससे पहले इसरो अध्यक्ष ने इसरो की उपलब्धि को लेकर एक और बयान जारी कर कहा था कि अपने पहले छोटे रॉकेट को अगले साल उड़ाने की योजना बना रहा है, जिसकी भार ले जाने की क्षमता 500-700 किलोग्राम होगी।  इसरो के अध्यक्ष के. शिवन ने आईएएनएस को बताया, “ऐसे छोटे रॉकेट जो करीब 500 किलोग्राम भार के उपग्रहों को ढो सकें, उनका विकास जारी है। पहले छोटे रॉकेट की उड़ान अगले साल हो सकती है।”

उन्होंने कहा कि छोटे रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित वर्तमान रॉकेटपोर्ट से लांच किया जाएगा।  एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एस. राकेश ने हाल ही में बेंगलुरू में आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा था कि कम लागत के छोटे रॉकेटों के लिए एक समर्पित लांच पैड की जरूरत है, जिसका सरल वर्टिकल लांच मैकेनिज्म होना चाहिए। राकेश ने कहा, “शुरुआत में एसएसएलवी को हमारे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित लांच पैड से लांच किया जाएगा। हम बाद में एक अगल से स्पेसपोर्ट बनाने पर काम करेंगे।”

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