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देश का पांचवां दिशासूचक उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में प्रक्षेपित

भारत ने पांचवें दिशासूचक उपग्रह आइआरएनएसएस 1-ई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। भारत ने यह प्रक्षेपण अपने विश्वसनीय पीएसएलवी सी-31 से किया।

Author श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) | January 20, 2016 11:13 PM
आइआरएनएसएस 1-ई आइआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली का पांचवां दिशासूचक उपग्रह है। (फोटो-इसरो)

भारत ने अमेरिका आधारित जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) जैसी अपनी उपग्रह दिशासूचक प्रणाली से लैस देशों के समूह में शामिल होने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए बुधवार को अपने पांचवें दिशासूचक उपग्रह आइआरएनएसएस 1-ई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। भारत ने यह प्रक्षेपण अपने विश्वसनीय पीएसएलवी सी-31 से किया। ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी-31 ने अपने सफर का आगाज सटीकता से करते हुए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9:31 बजे उड़ान भरी और 19 मिनट 20 सेकंड के बाद उपग्रह को कक्षा में प्रवेश करवा दिया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस प्रक्षेपण के लिए इसरो टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इसरो टीम को इस सफल प्रक्षेपण पर हार्दिक बधाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों के उत्साह और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है। मोदी ने ट्विटर पर कहा- पीएसएलवी सी-31 के सफल प्रक्षेपण और आइआरएनएसएस 1-ई को सटीकता के साथ कक्षा में स्थापित करने के अवसर पर इसरो व हमारे वैज्ञानिकों को उनके उत्साह और दृढ़ संकल्प के लिए बधाई।

आइआरएनएसएस 1-ई आइआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली का पांचवां दिशासूचक उपग्रह है। इस प्रणाली के तहत कुल सात उपग्रह हैं। इन सभी का प्रक्षेपण हो जाने के बाद यह प्रणाली अमेरिका आधारित जीपीएस के समकक्ष हो जाएगी। आइआरएनएसएस प्रणाली का संचालन शुरू करने के लिए वैसे तो चार ही उपग्रह काफी होंगे लेकिन बाकी के तीन उपग्रह इसे ज्यादा सटीक और दक्ष बनाएंगे। कुल 48 घंटे तक चली उल्टी गिनती के बाद जब राकेट साफ नीले आकाश में उड़ा तो पीएसएलवी के चारों चरणों को प्रोग्रामिंग के हिसाब से काम करते देख मिशन नियंत्रण केंद्र पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। आइआरएनएसएस 1-ई के दो सौर पैनल भूस्थैतिक कक्षा में उपग्रह को भेजे जाने के बाद एक-एक कर अपने आप ही क्रियाशील हो जाएंगे।

इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा कि आज आपके अंजाम दिए गए काम के लिए मैं पूरी इसरो टीम को बधाई देना चाहता हूं। आज इस नए साल में हम भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह के पांचवें प्रक्षेपण के साथ शुरुआत कर रहे हैं। यह सात उपग्रहों के समूह में से पांचवां है। इस उपग्रह को प्रक्षेपित करहमारे देश के भीतर हम हर रोज 24 घंटे किसी की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी सटीक जानकारी पा सकेंगे। भविष्य के प्रक्षेपणों के बारे में उन्होंने कहा कि हमें अभी लंबा सफर तय करना है। इस साल हम पृथ्वी का पर्यवेक्षण करने वाले उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बना रहे हैं। अभी हमें बहुत आगे जाना है। हमें इस समूह के दो और उपग्रह प्रक्षेपित करने हैं। इनका प्रक्षेपण अगले कुछ महीनों में होगा। कुमार ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों का इरादा इस साल जीएसएलवी मार्क-3 का प्रक्षेपण पूरा कर लेने का है। यह भूस्थैतिक कक्षाओं में भारी उपग्रहों को ले जाएगा।

मिशन के निदेशक बी जयकुमार ने कहा कि इसरो ने नए साल की शुरुआत एक बड़ी सफलता के साथ की है। आइआरएनएसएस 1-ई को बेहद सटीक ढंग से तय कक्षा में प्रवेश करवा दिया गया है। हमने इस प्रक्षेपण के लिए अपने साथ उपग्रह ले जा सकने वाले सबसे ताकतवर यान को लगाया। हमारे पास पीएसएलवी की तीन किस्में हैं। इस प्रक्षेपण के साथ हमने पीएसएलवी से 33 प्रक्षेपण पूरे कर लिए हैं।

आइआरएनएसएस 1-ई अपने साथ दो तरह के पेलोड- नेविगेशन पेलोड और रेंजिंग ले गया है। नेविगेशन पेलोड दिशासूचक सेवाओं से जुड़े सिग्नल प्रयोगकर्ताओं तक पहुंचाएगा जबकि अन्य उपग्रह की रेंज के सटीक निर्धारण में मदद करेगा। इसके मिशन की अवधि 12 साल है।

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