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Chandrayaan-2: चंद मिनटों के ‘लॉन्च विंडो’ पर टिकी थी मिशन की कामयाबी, समझें क्यों प्लेन जैसा नहीं अंतरिक्ष का सफर

Chandrayaan-2: क्या आपको पता है इस मिशन की कामयाबी चंद मिनटों के 'लॉन्च विंडो' पर टिकी थी। क्या आपको पता है अंतरिक्ष का सफर प्लेन जैसा नहीं।

चंद्रयान-2 मिशन। फोटो सोर्स: ISRO

Chandrayaan-2: भारत ने सोमवार (22 जुलाई 2019) को ‘चंद्रयान-2’ मिशन को लॉन्च कर दिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि चंद्रयान ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। जीएसलवी एमके-3 के जरिए ‘चंद्रयान-2’ को लॉन्च किया गया। इस मिशन की खासियत यह है पहली बार चांद के दक्षिण ध्रुव पर भारत का रोवर लैंड होगा और कई अहम जानकारियां जुटाएगा। कुल 3,850 किलोग्राम वजनी यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया है। चंद्रयान-2 को इससे पहले 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण मिशन को टाल दिया गया।

लेकिन क्या आपको पता है इस मिशन की कामयाबी चंद मिनटों के ‘लॉन्च विंडो’ पर टिकी थी। क्या आपको पता है अंतरिक्ष का सफर प्लेन जैसा नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे महत्वपूर्ण मिशन के लॉन्च के लिए समय ही सबकुछ होता है। ‘लॉन्च विंडो’ वह समय होता है जब चांद की पृथ्वी से दूर बेहद कम होती है। इस दौरान अंतरिक्ष में मौजूद अन्य किसी तत्व से टकराने की संभावना बेहद कम होती है। अगर भारत जुलाई महीने में मिशन को टाल देता तो अगला ‘लॉन्च विंडो’ सितंबर के समय में होता। अगर किसी तकनीकी कारण और खराब मौसम की समस्या खड़ी होती है तो एजेंसी अगले ‘लॉन्च विंडो’ के लिए मिशन को टाल देती है। अंतरिक्ष में किसी भी यान का सफर उस तरह का नहीं होता जिस तरह किसी सामान्य प्लेन का एक देश से दूसरे के लिए उड़ान भरने के लिए होता है। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता ऐसे में यान को सटीक जगह पर लॉन्च करवाना वैज्ञानिकों की काबिलियत को दर्शाता है। इसरो के वैज्ञानिकों ने भी अपनी इसी काबिलियत का लोहा कई बार मनवाया है।

इससे पहले अगर भारत 15 जुलाई को चंद्रयान-2 को लॉन्च करता तो रोवर के चांद की सतह पर पहुंचने में और कम समय लगता। इसरो के वैज्ञानिक ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया ‘चंद्रयान-2 के लिए इस महीने यानि की जुलाई 9 और 16 की तारीख सबसे बेहतर थी। अगर इस महीने इस लॉन्च नहीं किया जाता तो फिर सितंबर महीने में ही इसकी लॉन्चिंग होती।’ उल्लेखनीय है कि आज रवाना हुआ ‘चंद्रयान-2’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है। इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी जिससे ऐसी नयी खोज होंगी जिनका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा।

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