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ISRO Chandrayaan 2: राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने की इसरो की तारीफ, अबतक लैंडर से कोई संपर्क नहीं

Chandrayaan 2 Landing ISRO Chandrayaan 2 Moon Landing: चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया 1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ भारत का पहला मिशन था जो स्वदेशी तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खोज करने के लिए भेजा गया था।

chandrayaan 2, chandrayaan 2 landing, chandrayaan 2 landing live, chandrayaan 2 landing success or not,Chandrayaan-2: बेंगलुरु में ISRO मुख्यालय में पीएम नरेंद्र मोदी। (indian express photo)

Chandrayaan-2 Moon :  ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ के चांद की सतह को छूने से चंद मिनटों पहले जमीनी स्टेशन से उसका संपर्क टूट गया। चंद्रयान-2 मिशन से करीब से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने से कहा, ‘‘लैंडर से कोई संपर्क नहीं है। यह लगभग समाप्त हो गया है। कोई उम्मीद नहीं है। लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करना बहुत ही मुश्किल है।’’ भले ही लैंडर खो गया हो लेकिन इसरो की  हर तरफ तारीफ हो रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने इसरो की तारीफ करते हुए एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा ”चंद्रयान-2 मिशन के साथ इसरो की समूची टीम ने असाधारण प्रतिबद्धता और साहस का प्रदर्शन किया है। देश को इसरो पर गर्व है।’ उन्होंने कहा,  ‘हम सभी सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करते हैं।’

चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया 1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ भारत का पहला मिशन था जो स्वदेशी तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खोज करने के लिए भेजा गया था। लैंडर का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ.विक्रम ए साराभाई पर दिया गया थ। विक्रम को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया था और इसे एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करना था। लैंडर विक्रम के भीतर 27 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ था। सौर ऊर्जा से चलने वाले प्रज्ञान को उतरने के स्थान से 500 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर चलने के लिए बनाया गया था। प्रज्ञान को चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर जाना था जहां रोशनी नहीं है। ये इलाका अंधकार में डूबा रहता है, लेकिन यहां पानी होने की संभावना है। प्रज्ञान कि मदद से आईएसआरओ वहां पानी है या नहीं इसका पता लगाने वाला था। इसके अलावा ये भी पता करेगा कि वहां पर कोई मिनरल वगैरह भी हैं क्या?

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Highlights

    17:24 (IST)07 Sep 2019
    गलती कहां हुई इसकी पहचान कर लेगा इसरो

    नायर ने कहा कि कम से कम 10 ऐसे बिंदु हैं, जहां गलती गलती हो सकती थी, हालांकि वास्तव में गलती कहां हुई इसके बारे में अभी अनुमान लगाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि अभी तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उन्हें भरोसा है कि इसरो गलती कहां हुई इसकी पहचान कर लेगा। 

    17:06 (IST)07 Sep 2019
    पूर्व इसरो प्रमुख ने लैंडर से संपर्क टूट जाने पर निराशा व्यक्त की

    नायर ने हालांकि कहा कि लैंडर से संपर्क टूट जाना बेहद निराशाजनक है और उन्होंने इसकी कल्पना कभी नहीं की थी। उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए निराशाजनक है। पूरे देश को इससे उम्मीद थे।’’ पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘जब 2.1 किलोमीटर तक दूरी बची थी, उस समय अभियान बेहद जटिल था। हममें से आधे लोग हाथ थामकर बैठे थे क्योंकि कई यंत्रों और थ्रस्टर को सही तरह से काम करना था। तभी अंतिम उद्देश्य को पाया जा सकता था।’’

    16:38 (IST)07 Sep 2019
    आर्बिटर अंतरिक्ष में पहुंच गया है

    इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने ऑर्बिट सही है चंद्रमा की कक्षा में सामान्य रूप से काम कर रहा है। वहीं चंद्रयान-2 के चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने सहित कई अन्य उद्देश्य थे। उन्होंने कहा, ‘‘आर्बिटर अंतरिक्ष में पहुंच गया है और उसे मानचित्रण का काम अच्छे से करना चाहिए।’’ करीब एक दशक पहले चंद्रयान-1 मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद चंद्रयान-2 मिशन शुरू किया गया, जिसमें एक आर्बिटर लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल था।

    16:19 (IST)07 Sep 2019
    सोनिया गांधी ने कहा

    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, ''यह हमारे वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय क्षमता, ख्याति और हर भारतीय के दिल में उनके लिए खास जगह होने का प्रमाण है।’’ उन्होंने इसरो की अतीत की सफलताओं का उल्लेख किया और कहा कि हर रुकावट भविष्य की सफलता से पहले का एक पड़ाव भर है।

    16:00 (IST)07 Sep 2019
    सोनिया गांधी ने वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं की टीम की प्रशंसा की

    इसरो के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं की टीम की प्रशंसा करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह सफर थोड़ा लंबा जरूर हुआ है लेकिन आने वाले कल में सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा, 'हम इसरो और इससे जुड़े पुरुषों एवं महिलाओं के ऋणी हैं। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने भारत को अंतरिक्ष की दुनिया में अग्रणी देशों की कतार में शामिल कर दिया है और आगे की पीढ़ियों को प्रेरित किया है कि वे सितारों तक पहुंचे।'

    15:34 (IST)07 Sep 2019
    राष्ट्रपति ने ट्वीट कर ये कहा

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने भी इसरो की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा "'चंद्रयान-2 मिशन के साथ इसरो की समूची टीम ने असाधारण प्रतिबद्धता और साहस का प्रदर्शन किया है। देश को इसरो पर गर्व है।" उन्होंने कहा, ''हम सभी सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करते हैं।"

    15:05 (IST)07 Sep 2019
    कांग्रेस ने चंद्र मिशन पर इसरो की प्रशंसा की

    कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को इसरो के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि देश इसरो के वैज्ञानिकों के साथ खड़ा है। कांग्रेस पार्टी ने कहा, “तनाव की इस घड़ी में इसरो की पूरी टीम के साथ देश के लोग खड़े हैं। आपके कठिन परिश्रम और प्रतिबद्धता ने देश को गौरवान्वित किया है।”

    13:37 (IST)07 Sep 2019
    आपकी आंखें बहुत कुछ कह रही थीं

    मोदी ने वैज्ञानिकों से कहा, ‘‘मां भारती का सिर ऊंचा हो, इसके लिये आप पूरा जीवन खपा देते हैं। मैं कल रात की आपकी मन:स्थिति को समझता हू। आपकी आंखें बहुत कुछ कह रही थीं। आपके चेहरे की उदासी मैं पढ़ पा रहा था, इसलिये मैं आपके बीच ज्यादा देर नहीं नहीं रुका।’’

    13:11 (IST)07 Sep 2019
    हम वापसी करेंगे

    पीएम ने आईएसआरओ के वैज्ञानिकों से कहा, ‘‘आप मक्खन पर लकीर करने वाले लोग नहीं, बल्कि पत्थर पर लकीर करने वाले लोग हैं। अतीत में कई ऐसे अवसर आए हैं जब रुकावटों को पीछे छोड़ कर हमने वापसी की है।’’

    12:50 (IST)07 Sep 2019
    'प्रज्ञान' करने वाला था अहम खोज

    प्रज्ञान को चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर जाना था जहां रोशनी नहीं है। ये इलाका अंधकार में डूबा रहता है, लेकिन यहां पानी होने की संभावना है। प्रज्ञान कि मदद से आईएसआरओ वहां पानी है या नहीं इसका पता लगाने वाला था। इसके अलावा ये भी पता करेगा कि वहां पर कोई मिनरल वगैरह भी हैं क्या?

    12:17 (IST)07 Sep 2019
    प्रज्ञान 500 मीटर की दूरी तक चल सकता था

    विक्रम को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया था और इसे एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करना था। लैंडर विक्रम के भीतर 27 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ था। सौर ऊर्जा से चलने वाले प्रज्ञान को उतरने के स्थान से 500 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर चलने के लिए बनाया गया था।

    11:56 (IST)07 Sep 2019
    लैंडिंग से पहले सपंर्क टूट

    एक वरिष्ठ इसरो अधिकारी ने शनिवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ‘विक्रम’ लैंडर और उसमें मौजूद ‘प्रज्ञान’ रोवर को संभवत: खो दिया है। इससे पहले लैंडर जब चंद्रमा की सतह के नजदीक जा रहा था तभी निर्धारित सॉफ्ट लैंडिंग से चंद मिनटों पहले उसका पृथ्वी स्थित नियंत्रण केंद्र से सपंर्क टूट गया।

    11:35 (IST)07 Sep 2019
    हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है

    प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से कहा, ‘‘हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है, कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है।’’

    11:08 (IST)07 Sep 2019
    2.1 किलोमीटर पहले लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन ने कहा, ‘‘विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक सामान्य तरीके से नीचे उतरा। इसके बाद लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया। आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है।’’

    10:50 (IST)07 Sep 2019
    भारत का पहला मिशन जो स्वदेशी तकनीक की मदद किया गया

    चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया 1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ भारत का पहला मिशन था जो स्वदेशी तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खोज करने के लिए भेजा गया था। लैंडर का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ.विक्रम ए साराभाई पर दिया गया था।

    10:38 (IST)07 Sep 2019
    विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं

    इसरो के मिशन कंट्रोल सेंटर से प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा ‘‘विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें सबक लेना है, सीखना है। हम निश्चित रूप से सफल होंगे। कामयाबी हमारे साथ होगी।’’ मोदी ने कहा, "हम निश्चित रूप से सफल होंगे। इस मिशन के अगले प्रयास में भी और इसके बाद के हर प्रयास में भी कामयाबी हमारे साथ होगी।’’

    10:28 (IST)07 Sep 2019
    विक्रम से संपर्क की उम्मीदें टूटीं

    एक वरिष्ठ इसरो अधिकारी ने शनिवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ‘विक्रम’ लैंडर और उसमें मौजूद ‘प्रज्ञान’ रोवर को संभवत: खो दिया है। इससे पहले लैंडर जब चंद्रमा की सतह के नजदीक जा रहा था तभी निर्धारित सॉफ्ट लैंडिंग से चंद मिनटों पहले उसका पृथ्वी स्थित नियंत्रण केंद्र से सपंर्क टूट गया। चंद्रयान-2 मिशन से करीब से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने से कहा, ‘‘लैंडर से कोई संपर्क नहीं है। यह लगभग समाप्त हो गया है। कोई उम्मीद नहीं है। लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करना बहुत ही मुश्किल है।’’

    10:15 (IST)07 Sep 2019
    अभी सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है, कई नये क्षेत्रों में खोज करने के अवसर

    प्रधानमंत्री ने कहा "स्वास्थ्य सेवा से लेकर अन्य क्षेत्रों में हमारे वैज्ञानिकों का महतवपूर्ण योगदान है। जहां तक हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रमों का सवाल है, तो सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है। कई नये क्षेत्रों में खोज करने के अवसर हैं। मैं अपने वैज्ञानिकों से कहना चाहता हूं कि भारत आपके साथ है। आप विशिष्ठ पेशेवर हैं जो राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे रहे हैं।’’

    09:55 (IST)07 Sep 2019
    वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष कार्यक्रम पर गर्व

    पीएम ने कहा, ‘‘हम अपने वैज्ञानिकों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। हर भारतीय को अपने वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष कार्यक्रम पर गर्व है। हमारे कार्यक्रम ने न केवल हमारे नागरिकों बल्कि दुनिया के अन्य देशों की बेहतरी के लिये काम किया है।"

    09:45 (IST)07 Sep 2019
    हमारा हौसला कमजोर नहीं पड़ा है

    पीएम ने वैज्ञानिकों से कहा, ‘‘आपने पल-पल परिश्रम के साथ इसे आगे बढ़ाया था। आज भले ही कुछ रूकावटें आई हो, लेकिन इससे हमारा हौसला कमजोर नहीं पड़ा है बल्कि और मजबूत हुआ है। आज हमारे रास्ते में आखिरी कदम पर रूकावट आई है लेकिन हम अपनी मंजिल से डिगे नहीं हैं। ’’ उन्होंने कहा कि चंद्रमा तक पहुंचने और उसे गले लगाने की हमारी इच्छा शक्ति और प्रबल हुई है।

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