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मदरसे ने एयरफोर्स के मुस्लिम अधिकारी को दी ‘सलाह’- दाढ़ी बढ़ाने नहीं देते तो नौकरी छोड़ दो, अल्लाह से माफी मांगकर ढूंढो नया काम

इंडियन एयरफोर्स (IAF) के लिए काम कर रहे एक मुस्लिम अधिकारी के लिए 'फतवा' जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि अगर एयरफोर्स में काम करने के लिए उसे दाढ़ी बढ़ाने नहीं दी जारी तो उसको नौकरी जल्द से जल्द छोड़ देनी चाहिए।

Author October 16, 2016 8:56 AM
दारुल उलम देवबंद मदरसा। (फोटो- विकिपीडिया)

इंडियन एयरफोर्स (IAF) के लिए काम कर रहे एक मुस्लिम अधिकारी के लिए ‘फतवा’ जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि अगर एयरफोर्स में काम करने के लिए उसे दाढ़ी बढ़ाने नहीं दी जारी तो उसको नौकरी जल्द से जल्द छोड़ देनी चाहिए। साथ ही नई नौकरी ढूंढने तक उसे जितनी बार भी शेव करनी पड़े उतनी बार अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए। यह फतवा दारुल उलम देवबंद मदरसे की तरफ से जारी किया गया है। दरअसल, एयरफोर्स में काम करने वाले एक मुस्लिम शख्स ने मदरसे को खत लिखकर राय मांगी थी। उसने लिखा था, ‘मैंने उस उम्र में एयरफोर्स ज्वाइन किया था जब मेरी दाढ़ी नहीं आई थी। यहां काम करते हुए मैंने 10 साल पूरे कर लिए हैं। मुझे लगता है कि इस काम की वजह से ही मैं इस्लाम के ज्यादा पास आ पाया। क्योंकि मैं जगह-जगह घूमता हूं और नए-नए लोगों से मिलता हूं। अब मैं दाढ़ी रखना चाहता हूं लेकिन एयरफोर्स इसकी इजाजत नहीं देता। मुझे रोज शेव करके जाना पड़ता है। ऐसे में मेरे पास दो रास्ते हैं। या तो मैं बिना किसी सुविधा का फायदा उठाए नौकरी छोड़ दूं या फिर रोज शेव करता रहूं। कृपया मुझे बताएं कि क्या करना सही रहेगा। क्या मुझे नौकरी छोड़ देनी चाहिए ?’

यह सलाह मदरसे की वेबसाइट पर मांगी गई। वेबसाइट पर मदरसे की तरफ से लिखा गया, ‘अगर तुम्हारी आर्थिक स्थिति मजबूत है और तुम नौकरी छोड़ने पर भी घर चला सकते हो तो फिर बिना सोचा नौकरी छोड़ दो। लेकिन अगर आय का दूसरा साधन नहीं है तो फिर काम करते रहो और अपने आपको माफ करने के लिए अल्लाह से प्रार्थना करते रहो। साथ-साथ अपने लायक कोई दूसरी नौकरी भी ढूंढ लो।’ इसके आगे लिखा गया कि एयरफोर्स के नियमों के मुताबिक दाढ़ी रखने पर कोई पाबंदी नहीं है। बताया गया कि भारत के संविधान में भी अपने धर्म के रिवाजों को मानने की आजादी है। कहा गया कि सीनियर फिर भी नहीं मानते तो फिर उस अधिकारी को कोर्ट जाना चाहिए।

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बातचीत में दारुल उलम के वाइस चांसलर मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि उनकी तरफ से ही ऐसी सलाह दी गई थी। हालांकि, उन्होंने ज्यादा बातचीत नहीं की।

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