झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो को कथित तौर पर पुलिस ने शनिवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा यात्रा में भाग लेने के लिए सदर अस्पताल से निकलने से रोक दिया। यह तब हुआ जब भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।
राज्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे महतो ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को स्टेडियम की ओर जाने से रोकते हुए उनके साथ धक्कामुक्की की गई। उन्होंने यह भी कहा कि झड़प के दौरान उनकी छाती में चोट आई।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, ” 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मेरे साथ आज पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई। मेरे साथ मौजूद साथियों के साथ भी पुलिस द्वारा मारपीट की गई। कई दिनों से भूखा होने के बावजूद मैं अपने अधिकार और जनता की आवाज़ के लिए खड़ा हूँ। हमें इस तरह रोककर हमारी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।”
महतो ने कहा कि जयपाल सिंह स्टेडियम में झंडा फहराने जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने और धक्का-मुक्की के दौरान मेरे सीने में चोट लगी। फिलहाल मेरा इलाज और चिकित्सकीय जांच जारी है।
एक अन्य पोस्ट में महतो ने कहा कि पुलिस द्वारा लगातार धक्का-मुक्की कर मुझे रोका गया। आखिरकार मैं अपने रूम के गेट के बाहर ही बैठ गया हूँ। जब तक मुझे यहाँ से बाहर निकलने नहीं दिया जाता, तब तक मैं यहीं बैठा रहूँगा। मैं अपना इलाज भी नहीं करवाऊँगा और यहीं रहकर अपनी बात रखूँगा। मेरी लड़ाई जनता के अधिकार और न्याय के लिए है। मुझे रोककर मेरी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात
पुलिस के साथ झड़प से पहले महतो ने दावा किया था कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में ध्वजारोहण कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की अपनी इच्छा व्यक्त करने के बाद उनके अस्पताल के कमरे के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
महतो ने X पर पोस्ट किया, “आंदोलन स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित ध्वजारोहण और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जाहिर करने के बाद ही सदर अस्पताल में मेरे कमरे के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। आखिर क्या यही आज़ादी है? क्या हम अपने ही देश में तिरंगा फहराने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए भी स्वतंत्र नहीं हैं? कठिन परिस्थितियों के बावजूद मैं शांतिपूर्ण तरीके से इस कार्यक्रम में शामिल होना चाहता हूँ।”
यह स्टेडियम झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का मुख्य स्थल बनकर उभरा है।
रांची विधानसभा घेराव प्रदर्शन के बाद महतो को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया था।
हेमंत सोरेन ने पारदर्शी भर्ती परीक्षाओं का वादा किया
लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सोरेन ने राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान कहा कि राज्य के युवा मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और उनका हम पर भरोसा है। हमने व्यवस्था में बदलाव लाने का फैसला किया है। पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सोरेन ने कहा कि राज्य में “अच्छी शिक्षा प्रणाली” विकसित करने में छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो, जिन्हें छात्र कहते हैं झारखंड का ‘सोनम वांगचुक’?
देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के छात्र लीडर हैं। उन्होंने रांची में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। साथ ही बुंडू में अपनी स्कूलिंग पूरी की थी। देवेंद्र नाथ महतो ने संस्कृत के साथ-साथ कुरमाली, ट्राइबल और रीजनल भाषाओं में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री हासिल की थी। देवेंद्र महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है। पढ़ें पूरी खबर।
