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आम आदमी के इलाज के लिए एक दिन में औसतन 3 रुपये खर्च कर रही सरकार! 11000 लोगों पर महज 1 डॉक्टर

देश में पिछले कुछ सालों में जानलेवा बीमारियों की कहर देखने को मिला है। यूपी में साल 2017 और 2018 में ही इन्सेफेलाइटिस से करीब 1000 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं केरल में निपाह तो ओडिशा में ज्वाइंडिस से भी लोगों ने जान गंवाई है।

बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 100 को पार कर चुकी है। (फोटोः पीटीआई)

बिहार में इन्सेफेलाइटिस से बच्चों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बच्चों की मौत की संख्या 100 को पार कर चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी राज्य का दौरा कर चुके हैं। केंद्र की तरफ से हर संभव मदद के आश्वासन के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

14 दिन बाद नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर के अस्पताल का दौरा करने पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री को बच्चों के परिजनों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार ने बिमारी से निपटने के लिए केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट समिति का गठन किया है। इस सब के बीच सवाल  है कि क्या देश का पब्लिक हेल्थ सिस्टम पूरी तरह ढह चुका है?

प्रतिदिन स्वास्थ्य पर 3 रुपये खर्च कर रही सरकारः इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ पर सरकार की तरफ से खर्च की बात करें तो यह औसत भारतीय व्यक्ति पर प्रतिदिन 3 रुपये है। भारत अपनी कुल जीडीपी का 1.3 फीसदी हिस्सा ही स्वास्थ्य पर खर्च करता है। वहीं मालदीव अपनी जीडीपी का 9.4 फीसदी हिस्सा हेल्थ पर खर्च करता है। स्थिति यह है कि थाइलैंड (2.9%), भूटान( 2.5%), सिंगापुर (2.5%) और श्रीलंका (1.6%) भी भारत से ज्यादा राशि अपने हेल्थ सेक्टर पर खर्च करते हैं।

डॉक्टरों की भारी कमीः देश में 11.49 लाख सरकारी डॉक्टर हैं। इस तरह समग्र रूप से देखें तो 11000 लोगों पर 1 डॉक्टर इलाज के लिए उपलब्ध है। बिहार में 28,391 की आबादी पर महज एक सरकारी डॉक्टर है। जबकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियमों को अनुसार 1000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए।

वहीं, उत्तर प्रदेश में 19,962 लोगों पर 1 डॉक्टर इलाज के लिए उपल्ब्ध है। झारखंड में 18,518 लोगों पर 1 सरकारी डॉक्टर उपलब्ध है। मध्यप्रदेश में यह अनुपात 16996 लोगों पर एक सरकारी डॉक्टर का है। छत्तीसगढ़ में 15,916 लोगों पर एक सरकारी डॉक्टर उपलब्ध है। कर्नाटक में लोगों और डॉक्टर का अनुपात 13556:1 का है।

मोदी सरकार ने हेल्थ बजट के लिए साल 2018-19 में 52,800 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। 2019-20 के अंतरिम बजट में 61, 398 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस तरह यह पिछली राशि से 8598 करोड़ रुपये अधिक था।

यूपी में दो साल में करीब 1000 लोगों की मौतः इन्सेफेलाइटिस से उत्तर प्रदेश में साल 2016 में 621 मौतें हुई थीं। यूपी में साल 2017 में मौतों की संख्या बढ़ कर 654 पहुंच गई। पश्चिम बंगाल में 2015 में 351 मौत हुई थीं। बिहार में पिछले साल 7 मौतें हुई थीं। ओडिसा में साल 2014 में ज्वाइंडिस से 30 लोगों की जान गई थी। 2018 में केरल में निपाह वायरस से 17 लोगों की मौत हुई थी।

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