Is Conversion made of the Bangladeshi infiltrators ? - Jansatta
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क्या बांग्लादेशी घुसपैठियों का धर्मांतरण कराया गया ?

अंशुमान शुक्ल आगरा में जिन 387 मुसलमानों का धर्मांतरण कराया गया, क्या वे सभी बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं? उत्तर प्रदेश सरकार इस बात की बेहद संजीदगी से जांच करा रही है। बेहद गोपनीय जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल ने जिनका धर्मांतरण […]

Author December 12, 2014 12:34 PM
चित्र का इस्तेमान प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

अंशुमान शुक्ल

आगरा में जिन 387 मुसलमानों का धर्मांतरण कराया गया, क्या वे सभी बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं? उत्तर प्रदेश सरकार इस बात की बेहद संजीदगी से जांच करा रही है। बेहद गोपनीय जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल ने जिनका धर्मांतरण कराया, वे सभी बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। खुद उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था ने भी इस मामले को जांच का मुख्य बिंदु करार दिया है। आगरा में सोमवार को देवरी रोड पर वेद नगर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल ने धर्मांतरण का कार्यक्रम आयोजित किया था, इसमें 60 मुस्लिम परिवारों के 387 सदस्यों को हिंदू धर्म में वापस कराने का दावा किया गया था। इनमें से सभी कूड़ा बीनने और कबाड़ बेचने का काम करते हैं।

खुफिया विभाग का कहना है कि अब तक हुई पूछताछ में इन सभी ने खुद को पश्चिम बंगाल का बताया है, लेकिन ये सभी अपना मूल पता नहीं बता पा रहे हैं। इससे इन सभी के बांग्लादेशी घुसपैठिए होने का संदेह गहरा रहा है। अगर खुफिया विभाग की पड़ताल को सही माना जाए तो बड़ा सवाल उठता है कि क्या आरएसएस और बजरंग दल को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिन 387 लोगों का वे धर्मांतरण कराने की एक माह से कसरत कर रहे थे, उनका मूल कहां है? बात तीन वर्ष पुरानी है।

3 जनवरी वर्ष 2011 को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने लखनऊ में बांग्लादेशी घुसपैठियों से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा बताया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश से समझौता हो रहा है। लगे हाथ अगर हम बांग्लादेशी घुसपैठियों की बात भी कर लेते तो बेहतर होता। शायद तीन वर्ष के भीतर ही आरएसएस अपने सरसंघ चालक की बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में दी गई राय से नाइत्तिफाकी कर बैठा।

आगरा में जिनका धर्मांतरण कराया गया उनकी नागरिकता को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस बेहद गोपनीय जांच कर रही है। इस बात को प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था मुकुल गोयल ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकेत मिले हैं कि जिनका धर्मांतरण कराया गया वे बांग्लादेशी घुसपैठिये हो सकते हैं। इसीलिए इसकी बारीकी से तस्दीक कराई जा रही है। यह पता लगाने की कोशिशें जारी हैं कि आखिर जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ वे हैं कहां के? वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को प्रदेश के बाहर खदेड़ने का एक अभियान शुरू किया था। उस वक्त इस बात के दावे किए गए थे कि प्रदेश में पचास हजार के करीब बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं। तब शासन स्तर पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वे अपने जिलों में रहने वाले ऐसे घुसपैठियों के नाम व स्थाई पते की एक सूची बनाकर शासन को सौंपें।

इस आदेश के मिलने के तत्काल बाद लखनऊ पुलिस ने शहर के सात थाना क्षेत्रों हैदर कैनाल, कुड़ियाघाट, ऐशबाग रेलवे कालोनी, राजाजीपुरम, मड़ियांव, आशियाना और कुकरैल बंधे पर स्थित झुग्गी झोपड़ियों में छापे मारी भी की थी। लेकिन कुछ दिनों के बाद यह अभियान रस्म अदायगी भर बनकर रह गया।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धर्मांतरण की हकीकत पता है। प्रदेश के एक वरिष्ठ भाजपा नेता कहते हैं, आगरा में जिनको मुसलमान बताकर धर्मांतरण कराया गया वे सभी बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। इस हकीकत को भाजपा के सभी नेता जानते हैं। उसके बाद भी वे खामोश हैं। ऐसा इसलिए है कि वे इस प्रकरण पर अगर कुछ भी कहते हैं तो असम में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से बाहर करने का जो वादा किया था उसकी हवा निकल जाएगी।

फिलहाल आगरा में हुआ धर्मांतरण सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से अधिक भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश और केंद्र के भाजपा नेता इस घटना की तासीर को जानते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बजरंग दल और आरएसएस इस घटना को किन अर्थों में परिभाषित करने की कोशिश करते हैं। उसकी व्याख्या प्रदेश में भाजपा का भविष्य तो तय करेगी ही, समाजवादी पार्टी को भी बैठे बिठाए इतना दे जाएगी जो कल्पना से परे होगा।

 

 

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