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भारत की जासूसी की फिराक में ‘ड्रैगन’? दिल्ली में लगने वाले 1.5 लाख चीनी कैमरों पर NITI आयोग ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी की सरकार राजधानी में चीनी कंपनी हिकविजन के 1.5 लाख चीनी सीसीटीवी कैमरे लगवा रही है। इन कैमरों से चीन द्वारा भारत की जासूसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: June 29, 2019 12:44 PM
अमेरिका में चीन के इन कैमरों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली की आम आदमी पार्टी राजधानी में चीन की कंपनी हिकविजन के 1.5 लाख सीसीटीवी कैमरे लगवाने जा रही है। केजरीवाल सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में कैमरों को लगाने का ठेका सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (BEL) को दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं चीनी कंपनी के कैमरे लगा कर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं किया जा रहा है। कहीं ये राजधानी में ‘ड्रैगन’ की तरफ से जासूसी का प्रयास तो नहीं है।

एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार हिकविजन बदनाम कंपनी है। इस कंपनी के कैमरों पर अमेरिका में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। ब्रिटेन में भी इस कंपनी के कैमरों पर सवाल उठे हैं। हिकविजन कंपनी की मालिक कोई और नहीं बल्कि खुद चीनी सरकार है। ये जानकारी कंपनी की सालाना रिपोर्ट की जांच में सामने आई है। कंपनी के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर्स के रूप में चीन सरकार का नाम सामने आया है।

सभी नियमों का किया पालनः इन कैमरों के बारे में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह का कहना है कि हमने बीईएल को सीसीटीवी कैमरे लगवाने का काम दिया है। ये कैमरे दिल्ली मेट्रो में भी लगे हैं। यदि ये कैमरे बैन हैं तो दिल्ली मेट्रो में क्यों लगे हैं। हमने इसके लिए कम दाम दिए हैं और सभी नियमों का ठीक से पालन किया है।

नीति आयोग ने उठाए सवालः इससे पहले नीति आयोग की तरफ से चीनी कंपनी के कैमरे लगाने के बारे में गंभीर चिंता जताई जा चुकी है। नीति आयोग की बैठक में टेक्निकल इक्विपमेंट मैन्युफैकचरर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा था कि अमेरिका में ये कैमरे बैन हैं।

ऐसे कैमरे लगाने से बचने की जरूरतः रेलवे बोर्ड भी इस कंपनी के कैमरे लगाने का टेंडर देने वाला था। लेकिन इसके बाद नीति आयोग ने रेलवे बोर्ड को एक सिफारिश भेजी। इसमें लिखा गया था कि टीईएमए की सिफारिशों पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसी कंपनी के सीसीटीवी कैमरे लगाने से बचने की जरूरत है जिससे जासूसी की आशंका हो।

कैमरों में बैकडोर सिस्टम का आरोपः दरअसल, आरोप है कि चीन की हिकविजन कंपनी के कैमरों में बैक डोर एंट्री का सिस्टम है। यानि सीसीटीवी से ली जाने वाली तस्वीर को कैमरे का निर्माण करने वाली कंपनी हासिल कर सकती है।  रिपोर्ट के अनुसार चीन अपने यहां खुद 20 करोड़ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगा चुका है। इससे देश में एक इस तरह का वीडियो सर्विलांस नेटवर्क तैयार हो गया है जिसके जरिये देश में एक-एक व्यक्ति की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। इतनी ही नहीं चीन ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वाले कैमरे भी लगवाए हैं।

 

 

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