दिल्ली डिलीवरी एजेंट हत्याकांड में पीड़ित परिजनों ने एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी है। राष्ट्रीय राजधानी के उत्तम नगर स्थित प्रजापति कॉलोनी में रहने वाले पांडव कुमार के परिवार का कहना है कि पांच लोगों के परिवार में वह अकेले कमाने वाला था। वह ही घर का किराया देता था। साथ ही घर के सामान भी किश्तों पर खरीदता था। यह परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है।
आरोप है कि 21 वर्षीय पांडव की दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में तैनात हेड कॉनस्टेबल ने गोली मारकर हत्या कर दी है। कथित दौर पर दोनों के बीच बहस हुई थी, जो काफी बढ़ गई। इसी दौरान हेड कॉनस्टेबल ने उसे गोली मार दी। बहस के दौरान ‘बिहारी’ शब्द का भी बार बार इस्तेमाल किया गया था।
मृतक के छोटे भाई विकास ने भावुक होते हुए कहा कि घर में कोई कमाने वाला नहीं है। मम्मी-पाप बूढ़े और बीमार हैं। मुझे हड्डियों की टीबी है। उनकी मौत के बाद हम बिखर गए हैं। हमें नहीं पता कि हमारा भविष्य क्या है।
20 साल पहले दिल्ली आया था परिवार
जानकारी अनुसार यह परिवार अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ 20 साल पहले काम की तलाश में बिहार के खगड़िया जिले से दिल्ली आए था। सभी रिश्तेदार आस-पास ही रहते हैं। पांडव के पिता गणेश पहले फैक्ट्रियों में सफाईकर्मी का काम करते थे। हालांकि, स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।
पहले पांडव अपने छोटे भाई विकास, अपने पिता गणेश, माता मीना देवी और पांच साल की भांजी दीपिका के साथ उसी इलाके में एक दूसरे घर में रहते थे। हाल ही में वो एक कमरे के घर में शिफ्ट हुए थे। इस घर का किराया 5000 रुपये है, जो पांडव ही भरते थे। विकास बताते हैं कि बीमारी के कारण उन्हें छठी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। वह कहते हैं, “भैया ने मेरा इलाज कराने का वादा किया था।”
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी नीरज को हरियाणा के रोहतक स्थित उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया और उसकी सर्विस हथियार भी बरामद कर ली। पांडव के चचेरे भाई राहुल का कहना है कि परिवार की तीन मांगें हैं। मामले की तेज सुनवाई, इलाज के बाद विकास को सरकारी नौकरी और 1 करोड़ रुपये मुआवजा।
कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई
वह कहते हैं, “बताइए, क्या हम कुछ गलत मांग रहे हैं? सरकार कम से कम पांडव के भाई को एक नौकरी तो दे सकती है, चाहे छोटी ही क्यों न हो। एक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने बिना किसी गलती के पांडव की हत्या कर दी, परिवार को 1 करोड़ रुपये मिलना चाहिए।” इस मामले ने दिल्ली से पटना तक राजनीतिक प्रतिक्रिया भी पैदा की। 29 अप्रैल को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी परिवार से मुलाकात कर सहायता का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई है।
घर की हालत का जिक्र करते हुए विकास एक कूलर और वॉशिंग मशीन की ओर इशारा करते हैं और कहते हैं कि ये सामान पांडव ने किस्तों पर खरीदा था। विकास के पास जो एकमात्र स्मार्टफोन है वह भी पांडव का ही था, जिसे उन्होंने EMI पर लिया था और अब परिवार किस्तें भरने में असमर्थ है।
एलपीजी सिलेंडर की ओर इशारा करते हुए वह कहते हैं, “भैया ही सिलेंडर भरवाते थे… अब वह खाली है। हमें कमरे के बाहर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।” विकास बताते हैं कि पिछले साल किस्तों पर खरीदी गई एक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल को पुलिस ने केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त कर लिया है।
घटना वाले दिन क्या हुआ?
पांडव के रिश्तेदार रूपेश कुमार ने उन्हें और परिवार के कई सदस्यों को जाफरपुर कलां के रावता गांव स्थित अपने घर पर अपने दो साल के बेटे की जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था। पार्टी देर रात करीब 1:30 बजे खत्म हुई और सभी लोग घर की ओर चले। पांडव, उनके दोस्त कृष्ण और चचेरे भाई दीपक उनकी बाइक पर बैठे थे। जबकि तीन अन्य रिश्तेदार एक स्कूटर पर थे।
रूपेश के बयान के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक वे लोग आपस में बात कर रहे थे। तभी सड़क के उस पार गली नंबर-7 में स्थित अपने घर से नीरज बाहर आया। रूपेश ने अपने बयान में कहा, “उसने हमें गालियां दीं और धमकाते हुए कहा, ‘तुम लोग इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?'”
प्राथमिकी में नीरज के हवाले से कहा गया है, “नीरज के हाथ में एक पिस्तौल थी। उसे लहराते हुए उसने कहा कि तुम बिहारियों ने यहां हंगामा मचा रखा है। हर कोई यहां घर बना रहा है और यहीं आकर जमा हो गया है, जिससे यहां का माहौल खराब हो रहा है। इसका हम स्थानीय निवासी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन आज मैं सब ठीक कर दूंगा।”
सर्विस पिस्तौल से गोली मारकर हत्या
रूपेश ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने पहले स्कूटर पर सवार लोगों की तरफ बंदूक तानी, लेकिन वे लोग वहां से निकल गए। एफआईआर में बताया गया है कि अधिकारी ने थोड़ी दूर तक उनका पीछा किया और फिर वापस आकर रूपेश और पांडव से फिर से उलझ गया। रूपेश ने आरोप लगाया, “मैंने हाथ जोड़कर उससे कहा कि यह मेरी गलती थी। मैंने कहा कि मैं अपने घर वापस चला जाऊंगा और अपने रिश्तेदारों को भी घर जाने दूंगा। लेकिन वह लगातार गुस्सा होता रहा और गालियां देता रहा। फिर उसने अपनी पिस्तौल उस मोटरसाइकिल की तरफ तान दी जिस पर पांडव बैठा था और गोली चला दी।”
गोली पांडव को लगी, फिर उसके सीने को चीरती हुई निकल गई और कृष्ण के पेट में जा लगी। पुलिस ने बताया था कि इस घटना में जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया था वह कथित तौर पर 9 एमएम की ग्लोक पिस्तौल थी, जो नीरज का सर्विस हथियार था। पुलिस ने बताया कि जाफरपुर कलां उसके अधिकार क्षेत्र में आता था, इसीलिए उस समय वह हथियार उसके पास था।
हत्या के विरोध में इलाके में धरना प्रदर्शन हो रहा है। धरनास्थल पर एक पोस्टर लगा हुआ है, जिसमें लिखा है, “क्या बिहारी होना गुनाह है?” वहीं पर उसकी अस्थियां भी रखी हुई हैं। एक स्थानीय राहुल ने कहा, “क्या यह हमारी गलती है कि हम सिर्फ गुजeरा करने के लिए काम करते हैं?” वह कहता है कि उसे 29 अप्रैल को सीएम रेखा गुप्ता से मिलने के लिए बुलाया गया था, जिन्होंने विकास और पांडव की भतीजी की पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया था। हालांकि, उसने यह दावा किया कि परिवार को अब तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली है।
