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‘नरेंद्र मोदी राज’ में घंट गईं IRS अफसरों की नियुक्तियां, 2013 के बाद पदों में 74% गिरावट

आगे कस्टम और सेंट्रल एक्साइज विभाग के एक अफसर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, "400 लोगों को सेवा में भर्ती करना सतत नहीं है। प्रमोशन में उससे बाद में दिक्कतें आती हैं।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार के कार्यकाल में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अफसरों की नियुक्तियों में भारी गिरावट दर्ज हुई। आंकड़े बताते हैं कि साल 2013 के बाद से इस क्षेत्र में तकरीबन 74 फीसदी पद घट गए। बता दें कि आईआरएस अफसरों का काम देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर को वसूलने के साथ उससे जुड़े प्रशासनिक काम-काज को भी संभालना होता है।

भारत सरकार के आकंड़ों के हवाले से ‘द प्रिंट’ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 2013 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के जरिए 409 आईआरएस अफसरों का चयन किया गया था, जबकि 2017 में यह आंकड़ा लगभग आधा हो गया। उस वर्ष केवल 208 आईआरएस अफसरों को चुना गया। वहीं. 2018 में यह आंकड़ा 106 पर आ गया।

हालांकि, इस आकड़े के संबंध में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन 106 में असल में कितनों की भर्ती होगी। दरअसल, हाल ही में यूपीएसएसी ने परीक्षा के नतीजे घोषित किए थे, जबकि सर्विस का आवंटन किया जाना अभी बाकी है।

अधिकतर सरकारी अधिकारियों ने इस बारे में कहा, “यह गिरावट आईआरएस के ‘जंबो बैचों’ की वजह से आ रही है, जो कि 2016 से बनाए जा रहे हैं। ऐसे में अब संतुलन बैठाने की जरूरत है। सरकार तकरीबन 400 आईआरएस अफसरों के बैच ले रही थी। ऐसे में यह संख्या गिराने की जरूरत है, ताकि व्यवस्था पटरी पर आ सके।”

आगे कस्टम और सेंट्रल एक्साइज विभाग के एक अफसर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, “400 लोगों को सेवा में भर्ती करना सतत नहीं है। प्रमोशन में उससे बाद में दिक्कतें आती हैं। आप एक बार में 400 लोगों को भर तो लेंगे, पर उनमें से कुछ को ही प्रमोशन मिल पाएगा।”

यह पूछे जाने पर कि आखिर जंबो बैच में ये भर्तियां होती क्यों थीं? डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के एक अधिकारी ने इस बारे में बताया कि 2001 में विभाग का पुनर्गठन हुआ, जबकि 2003 के बाद सरकार ने उन पदों को भरने के लिए भारी पदों में भर्तियां कर ली थीं। लगभग एक दशक बाद विभाग में वे पद फिर से बढ़ गए हैं।

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