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महामारी से बेपरवाह लोगों का हुजूम बढ़ा पहाड़ों की तरफ

कोरोना महामारी की तीसरी लहर के अंदेशे के बीच हिमाचल प्रदेश के पर्यटनों स्थलों की तरफ सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ा है।

सांकेतिक फोटो

ओमप्रकाश ठाकुर

कोरोना महामारी की तीसरी लहर के अंदेशे के बीच हिमाचल प्रदेश के पर्यटनों स्थलों की तरफ सैलानियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। जून महीने में ही नहीं जुलाई महीने में भी अब तक प्रदेश के तमाम पर्यटक स्थलों में बेपरवाह सैलानियों ने दस्तक दी हुई है। राजधानी शिमला में ही पांच जुलाई से 15 जुलाई तक एक सप्ताह में शोघी बैरियर से शिमला की ओर 38,355 वाहन गुजरे हंै। पर्यटन से जुड़ी आर्थिकी को संबल देने की मंशा से प्रदेश की सरकार ने भी बंदिशें लगाने से परहेज किया है। हालांकि केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चिंता जताए जाने के बाद तमाम पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि कोविड नियमों का पालन किया जा सके।

पुलिस ने शिमला से लेकर मनाली और कांगड़ा व डलहौजी तक तमाम पर्यटन स्थलों पर 30 अगस्त अतिरिक्त पुलिस तैनात कर दी है। पुलिस के अलावा सभी पर्यटन स्थलों के होटल संघों, वॉल्वों बस संघों और व्यापार संघों ने अपने स्तर पर कई तरह की पहल की है। मनाली में मॉल रोड, व अन्य जगहों पर जहां प्रवेश द्वार हैं वहां पर मास्क बांटने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा सैलानियों को जागरूक भी किया जा रहा है कि वे कोविड नियमों का पालन करें। इन संघों का मानना है कि अगर किसी भी तरह की पांबदी लगती है तो सबसे ज्यादा प्रभावित पर्यटन कारोबार ही होता है। ऐसे में तमाम होटलों में कोविड नियमों को लेकर तमाम तरह के इंतजाम किए गए हैं।

मनाली होटल संघ के उपाध्यक्ष मुकेश ठाकुर कहते हैं कि वे अपनी ओर से हर तरह के प्रयास कर रहे हैं। आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के साथ लाने की अनिवार्यता करना या किसी तरह की पांबदी करना इस मसले का कोई समाधान नहीं है। अगर तीसरी लहर आई तो क्या होगा। ठाकुर कहते हंै कि तमाम हितधारक अब खुद आगे आ रहे हैं और सैलानी भी उनकी बात मान रहे हंै। अगर पुलिस चालान करेगी तो सैलानी नाराज होगा। ऐसे में बाहर भी गलत संदेश जाएगा। सैलानी यहां अपने परिवार के साथ तफरीह करने आते है। कोई कड़वा अनुभव ले कर जाए तो यह अच्छी बात नहीं है।

वाल्वो बस संघ के अध्यक्ष वरुण मल्होत्रा कहते है कि बड़ी मुश्किल से तो पांबदियां खुली हैं। सोशल मीडिया व मीडिया में भीड़ की जो तस्वीरें गई हैं उनमें सब सैलानी ही नहीं है। मनाली घूमने अब प्रदेश के लोग भी आने लगे हैं। वे सोलंग व खासकर अटल सुरंग देखने जाते हैं। ऐसे में शाम को माल रोड पर भीड़ एकत्रित हो जाती है। होटलों में तो सप्ताहांंत में ही 60 से 70 फीसद तक बुकिंग होती है। अब अगर किसी तरह की बंदी लगी तो पर्यटन उद्योग तो तबाह हो जाएगा।

याद रहे मनाली में सबसे ज्यादा सैलानी पहुंच रहे हंै। जून महीने में प्रदेश में साढे चार लाख के करीब सैलानी पहुंच गए। इनमें से 1 लाख 64 हजार 57 सैलानी मनाली में गए। जबकि मई महीने में प्रदेश में 51243 ही सैलानी आए थे। उधर कबाइली जिला किन्नौर में भी इन दिनों सैलानियों का हुजूम लगा है। खासकर सप्ताहांत में होटलों में 60 से 70 फीसद तक की बुकिंग हो जाती थी।

इस कबाइली जिले में दूसरी लहर के दौरान होटलियरों ने बिना आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आने वाले सैलानियों को अपने होटलों में जगह देने से इनकार कर दिया था। यहां पर पंचायतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। किन्नौर होटल संघ के सचिव मुकेश रामधारी कहते हंै कि अगर तीसरी लहर रोकने के लिए सैलानियों को आरटीपीसीआर की रिपोर्ट लाना अनिवार्य है। अगर तीसरी लहर आई और पाबंदियां लगीं तो वे पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। अब पर्यटन उद्योग और बंदी नहीं झेल सकता।

हालांकि अब सरकार का पूरा जोर कोविड नियमों का पालन कराने पर आ गया है। इसके तहत राजधानी शिमला के माल रोड और रिज मैदान पर एक सीमा से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर पांबदी लगा दी गई है। रिज व माल रोड पर बैठने के लिए लगाए गए तमाम बैंचों को हटा दिया गया है। माल व रिज के अलावा बाकी भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी लोगों की सीमिति संख्या करने की योजना है। जिला उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी कहते हंै कि सैलानियों को माल रोड व रिज पर बैठने की इजाजत नहीं देंगे। केवल बुजुर्गों को ही रियायत रहेगी। माल रोड और रिज तक पहुंच को नियंत्रित किया जाएगा ताकि सामाजिक दूरी का पालन किया जा सके।

शिमला ही नहीं बाकी जिलों में भी प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजााम कर दिए हंै और मास्क पहनने की शर्त को तो सख्ती से ही लागू किया जा रहा है। पहाड़ों पर भीड़ की तस्वीरें और वीडियो देखने के बाद सरकार भी सक्रिय हुई है।

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