MSP पर फसलों की खरीद में अनियमितता : राकेश टिकैत; किसान नेता ने की सीबीआई जांच की मांग

आरोप लगाया, “उत्तर प्रदेश में, गेहूं और धान की खरीद एक संगठित तरीके से की जाती है। किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद का सरकार का दावा एक हथकंडा से ज्यादा कुछ नहीं है। यूपी में किसानों से गेहूं की खरीद नहीं की गई है।”

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दिल्ली के गाजीपुर बार्डर पर संवाददाताओं से बात करते किसान नेता राकेश टिकैत। (फोटो- एएनआई)

किसान नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया और सीबीआई जांच की मांग की। भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता टिकैत ने दावा किया कि गेहूं सहित कई फसलें किसानों के बजाय बिचौलियों के माध्यम से खरीदी गई हैं, जिनकी सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी पहचान है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में ऐसी कथित अनियमितताओं के कई उदाहरण हैं। आरोप लगाया कि मिल मालिक, बिचौलिए, प्रशासन के अधिकारी और खरीद केंद्र संचालक इस “घोटाले” के लाभार्थी हैं। गाजीपुर सीमा पर प्रेस से बात करते हुए टिकैत ने कहा कि उनके पास कथित अनियमितताओं के सबूत हैं और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की। एक बयान में उन्होंने कहा, “वास्तव में, देश में आठ प्रतिशत किसानों को भी एमएसपी नहीं मिल रही है। देश में सरकार द्वारा एमएसपी के नाम पर किसानों को लूटा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर 23 फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा की गई है, लेकिन केवल दो या तीन पर दिया जाता है। कहा, धान बिहार और दक्षिणी राज्यों में न्यूनतम आधिकारिक दरों से कम पर बेचा जाता है। आरोप लगाया, “उत्तर प्रदेश में, गेहूं और धान की खरीद एक संगठित तरीके से की जाती है। किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद का सरकार का दावा एक हथकंडा से ज्यादा कुछ नहीं है। यूपी में किसानों से गेहूं की खरीद नहीं की गई है।”

उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद के मामले में यूपी जैसा बड़ा राज्य हरियाणा और पंजाब से भी पीछे देश में चौथे स्थान पर है। “यूपी सरकार ने अपनी सांख्यिकीय बाजीगरी के हिस्से के रूप में, अब गेहूं की लक्षित खरीद के आधिकारिक आंकड़ों को भी समाप्त कर दिया है।

भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले नौ महीने से आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं।

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