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इराक : अल-सद्र व ईरान समर्थित समूह में टकराव बढ़ा

इराक में पिछले 10 महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है।

इराक : अल-सद्र व ईरान समर्थित समूह में टकराव बढ़ा

इराक की शीर्ष न्यायिक संस्था ने साफ कर दिया है कि उसके पास देश की संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है। वहां के प्रभावशाली शिया मौलाना अल-सद्र ने न्यायिक संस्था को संसद भंग करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था, ताकि देश में नए सिरे से चुनाव कराए जा सकें। अब वहां की सुप्रीम जूडिशियल काउंसिल के ताजा फैसले से मौलाना मुक्तदा अल-सद्र के अनुयायियों और ईरान-समर्थित समूह के सदस्यों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

इराक में पिछले 10 महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है। इससे पहले वर्ष 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद से पहली बार देश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति इतने महीनों तक जारी रही है। रविवार को हुई बैठक के बाद सुप्रीम जूडिशियल काउंसिल के एक बयान में कहा कि राजनीतिक संगठनों को अपनी ‘प्रतिद्वंद्विता और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ में न्यायपालिका को नहीं घसीटना चाहिए। न्यायिक संस्था ने एक बयान में कहा है, ‘सुप्रीम जूडिशियल काउंसिल’ के पास संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है।’ उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का मुख्य काम कानूनी मसलों को हल करना है और वह ‘विधायिका और कार्यपालिका के काम में दखल नहीं दे सकती है।’

इस महीने की शुरुआत में अल-सद्र के समर्थक बगदाद स्थित संसद भवन पहुंच गए थे और तभी से वहां धरना पर बैठे हुए हैं। अल-सद्र ने पिछले हफ्ते ट्वीट करके कहा था कि न्यायपालिका के पास संसद को भंग करने के लिए एक सप्ताह का वक्त है। इससे पहले भी अल-सद्र ने संसद को भंग करने की मांग की थी ताकि चुनाव कराया जा सके, लेकिन इस बार उन्होंने इसके लिए तारीख तय की थी।

बीते चुनावों में अल-सद्र के धड़े को संसद में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं लेकिन वह बहुमत की सरकार बनाने में असफल रही। उन्होंने शनिवार की रात अपने समर्थकों से पूरे देश में प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहने को कहा था, जिसके बाद इराक में तनाव और बढ़ गया था।

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