ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर ब्रिक्स देशों के भीतर राय बंटी होने के कारण आपसी सहमति बन पाना मुश्किल था। ऐसे में भारत सरकार ने शुक्रवार को अध्यक्ष का सारांश जारी करते हुए कहा कि सदस्यों ने मिडिल ईस्ट में हालिया संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस पर अपने विचार और आकलन पेश किए।

अध्यक्षता कर रहे देश का बयान किसी भी समूह के मेजबान और अध्यक्ष द्वारा की एक घोषणा होती है। यह बयान का सारांश होता है, लेकिन इस पर सभी सदस्यों की सहमति नहीं होती। आमतौर पर, किसी भी बहुपक्षीय बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया जाता है, जिस पर सभी सदस्यों की सहमति होती है। 2023 के शिखर सम्मेलन से पहले हुई जी20 बैठकों में भी यही चलन रहा, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई थी।

भारत कर रहा अध्यक्षता

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। भारत ने कहा, “BRICS के उप विदेश मंत्रियों और मीडिल ईस्ट तथा उत्तरी अफ्रीका (MENA) मामलों के विशेष दूतों ने 24 अप्रैल को नई दिल्ली में मुलाकात की और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श किया। सदस्यों ने मिडिल ईस्ट में हाल ही हो रहे संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस मामले पर अपने विचार तथा आकलन पेश किए।”

इन मुद्दों पर की गई चर्चा

पत्र में कहा गया,”चर्चाओं में फिलिस्तीन का मुद्दा और गाजा की स्थिति भी शामिल थी, जिसमें मानवीय सहायता उपलब्ध कराना, यूएनआरडब्ल्यूए की भूमिका, आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस का नजरिया, लेबनान में सीजफायर का स्वागत, यूएनआईएफआईएल पर हमलों का अस्वीकार्य होना, सीरिया में संघर्ष के बाद पुननिर्माण और पुनर्वास, यमन में राजनीतिक समाधान, इराक में स्थिरता और विकास, लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया और सूडान में मानवीय संकट से निपटना शामिल था। उन्होंने 2027 में चीन की अध्यक्षता में फिर से मिलने पर सहमति जताई।”

पिछले माह मार्च में द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट छापा था, जिसमें कहा गया था कि 13 मार्च को ईरान ने भारत से बात की थी। ईरान चाहता था कि भारत, जो इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, ब्रिक्स की ओर से एक बयान जारी करने में अगुवाई करे। इस बयान में पिछले दो हफ्तों के दौरान ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की जानी थी।

भारत के सामने कूटनीतिक दुविधा

इससे दिल्ली एक कूटनीतिक दुविधा में फंस गई क्योंकि वह चल रहे संघर्ष में किसी का भी पक्ष लेने से दूर रही है।

BRICS समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ये मूल देश हैं) के साथ-साथ मिस्त्र, इथोयोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया भी शामिल है। सऊदी अरब और यूएई में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं, जिन्हें हाल ही में ईरान ने निशाना बनाया। ऐसे में ये तीनों देश भारत के लिए कूटनीतिक राह को मुश्किल बना देता है। भारत इस साल अंत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

नहीं बन पा रही सभी देशों की आपसी सहमति

ईरान BRICS की ओर से एक बयान जारी करवाने के लिए भारत से संपर्क किए जाने के बाद दिल्ली ने मार्च के मध्य में यह सार्वजनिक कर दिया था कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना मुश्किल हो रहा क्योंकि इस संघर्ष में BRICS सदस्य देश भी शामिल हैं।

बिना किसी देश का नाम लिए विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “BRICS के कुछ सदस्य पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिसका असर चल रहे संघर्ष पर BRICS के साझा रुख पर आम सहमति बनाने पर पड़ा है। अध्यक्ष के तौर पर, भारत शेरपा चैनल के जरिए सदस्यों के बीच चर्चा को बढ़ावा दे रहा है।”

उन्होंने कहा कि पिछली वर्चुअल ब्रिक्स शेरपा बैठक 12 मार्च को हुई थी। इसके अलावा, एमईए के प्रवक्ता ने कहा, भारतीय नेतृत्व इस क्षेत्र में ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ संपर्क बनाए हुए है। भारत यह संपर्क जारी रखेगा।

मई में हो सकती है फिर मीटिंग

सूत्रों के मुताबिक, भारत 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर सकता है, जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के शामिल होने की उम्मीद है। परिस्थितियों के आधार पर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची इस बैठक में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष और सीजफायर वार्ता के चलते कई घटनाक्रम चल रहे हैं, लेकिन दिल्ली विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए जमीन तैयार कर रहा है।

ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारी विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए एक-दूसरे के संपर्क में हैं, जिसके बाद इस साल के आखिर में भारत में ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन होगा। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक का समय काफी अहम है, क्योंकि भारत मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को लेकर ब्रिक्स समूह के बीच आम सहमति बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है।

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आरएसएस नेता और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने टैरिफ से लेकर तेल सोर्सिंग के फैसलों तक, अमेरिका की कई मांगों पर सहमति जताई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें