नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले दिन गुरुवार को पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच तीखे मतभेद खुलकर सामने आए। इस टकराव ने यह संकेत दिया कि मौजूदा संकट पर साझा रुख अपनाने में BRICS समूह को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह पता चला है कि सम्मेलन के दो सत्र में से एक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस हुई। शांति कायम करने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को हस्तक्षेप करना पड़ा। हाल के हफ्तों में यूएई में ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के हमलों को लेकर ईरान और यूएई के बीच तीखी बयानबाजी हुई है जिसके परिणामस्वरूप ब्रिक्स पश्चिम एशिया संकट पर एक सर्वसम्मत बयान जारी करने में विफल रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान ‘गैरकानूनी विस्तारवाद और युद्धोन्माद’ का शिकार है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन की ‘स्पष्ट निंदा’ करने की अपील की।

अरागची ने कहा कि ब्रिक्स देशों को ‘पश्चिमी वर्चस्व’ और अमेरिका की उस मानसिकता का विरोध करना चाहिए जिसमें वह खुद को दंडमुक्त मानता है। उन्होंने कहा, ”ईरान ब्रिक्स सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करता है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई अवैध आक्रामक कार्रवाई की खुलकर निंदा करें।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स को एक ‘न्यायपूर्ण, संतुलित और मानवीय वैश्विक व्यवस्था’ के निर्माण में प्रमुख स्तंभ बनना चाहिए जहां ताकत को ही सही नहीं माना जाए। हालांकि अपने भाषण में अरागची ने सीधे तौर पर यूएई का नाम नहीं लिया।

यूएई के विदेश मंत्री ने क्या कहा

यूएई के विदेश मंत्री ने इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। यूएई के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने अपने बयान में ईरान का जिक्र करते हुए तेहरान पर पड़ोसी देशों पर हमले करने का आरोप लगाया। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद अरागची ने जवाब देते हुए कहा कि यूएई ने अमेरिका को अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करने दिया।

हाल के हफ्तों में ईरान और यूएई के बीच यूएई के ऊर्जा ढांचे पर कथित हमलों को लेकर तनाव बढ़ा है। इसी मतभेद के कारण ब्रिक्स देश पश्चिम एशिया संकट पर साझा बयान जारी करने में अब तक सहमति नहीं बना सके हैं।

ईरान-यूएई के बीच बढ़ रहा तनाव

पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और यूएई के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यूएई ने तेहरान पर अपने ऊर्जा ढांचे पर हमलों का आरोप लगाया है जबकि ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। दोनों देशों के बीच इसी टकराव का असर अब ब्रिक्स मंच पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

ब्रिक्स समूह आम सहमति (Consensus) के आधार पर काम करता है। लेकिन पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और यूएई के बीच गहरे मतभेदों के कारण संगठन अब तक कोई साझा बयान जारी नहीं कर पाया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक किसी संयुक्त घोषणा पत्र (Joint Declaration) पर सहमति बना पाती है या नहीं।

BRICS में कौन-कौन से देश

BRICS में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में इसका विस्तार कर इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बना।

भारत की मेजबानी में हो रही यह ब्रिक्स बैठक ऐसे समय में बेहद अहम मानी जा रही है जब यह प्रभावशाली समूह पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक असर से जूझ रहा है। खास तौर पर ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर बाधाएं और तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता सदस्य देशों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं।

इसके अलावा अमेरिका की व्यापार और टैरिफ नीतियां भी ब्रिक्स देशों के लिए चुनौती पैदा कर रही हैं। ऐसे में नई दिल्ली में हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के साझा रुख को तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।