अमेरिका ईरान युद्ध के सीजफायर की घोषणा के बाद प्रतिक्रियाओं का एक दौर शुरू हो गया है। एक महीने से अधिक से जारी युद्ध के अस्थायी रूप से रुकने पर एक ओर जहां आम जनता ने राहत की सांस ली है, वहीं अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही है।

अमेरिका द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताने के बाद लखनऊ के शिया धर्मगुरु मौलाना शैफ अब्बास ने कहा, “मैं ईरान के बहादुर लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जो कल सड़कों पर उतर आए और उन्होंने ऐलान किया कि अगर अमेरिका उन पर बमबारी करता है तो वे अपने पुलों की रक्षा करेंगे। मेरा मानना है कि उनकी इसी बहादुरी की वजह से अमेरिका 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हुआ है।”

उन्होंने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि यह 14 दिनों का युद्धविराम नहीं है, यह ईरान की जीत है। अमेरिका और इजरायल की दहशतगर्दी पूरे विश्व पर छाई हुई थी, लेकिन ईरान की बहादुरी की वजह से सुपर पावर घुटनों पर आ गया है। अब संभावना है कि इजरायल भी कंट्रोल में आएगा।

उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एग्जिट ढूंढ रहे थे। सीजफायर वही एग्जिट है। ईरान ने भले ही लाशें उठाईं लेकिन आज वहां की जनता अपने बहादुरी के दम पर जश्न मना रही है। जबकि अमेरिका-इजरायल में मातम पसरा है। ईरान ने छोटे मुस्लिम देशों को एक बड़ा संदेश दिया है। उन्हें ईरान का धन्यवाद करना चाहिए।

इधर, लखनऊ में न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यसूब अब्बास ने कहा, “अमेरिका खुद को एक महाशक्ति मानता था। लेकिन जंग के 40वें दिन, ईरान जीत गया है और अमेरिका तथा इजरायल हार गए हैं। मैं ईरान की जीत पर सभी को बधाई देता हूं।”

उन्होंने कहा, “अमेरिका ने धमकी दी थी कि वो ईरान की संस्कृति मिटा देगा। पूरी इंफ्रास्ट्रकचर ध्वस्त कर देगा। लेकिन आज उसने खुद हार मान ली। मैं ईरान की फतह पर सभी को बधाई देता हूं।”

गौरतलब है कि इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त जंग पर फिलहाल दो हफ्तों का विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति जताई है। यह फैसला तेहरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए दी गई उनकी समयसीमा खत्म होने से दो घंटे से भी कम समय पहले लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने भी इस युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव में फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। युद्ध के बीच इस सकारात्मक पहल से विश्वभर के लोगों ने राहत की सांस ली है।

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