अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से Axios की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमवार रात ईरानी सेना ने होर्मुज जलमार्ग से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान ने करीब तीन हफ्ते पहले एक समझौते के तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना नहीं बनाने पर सहमति जताई थी। यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलमार्ग में हमले रोकने के लिए हुए एक सप्ताह के अस्थायी समझौते के खत्म होने के तुरंत बाद हुई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय भी सामने आया है जब ईरान में लोग पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक मना रहे हैं। खामेनेई की मौत इस संघर्ष की शुरुआत में हुई थी।
व्यापारिक जहाजों को बनाया निशाना
ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलमार्ग से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के लिमाह से करीब 8 समुद्री मील पूर्व में एक टैंकर को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार) से निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला जहाज के बाएं हिस्से (पोर्ट साइड) पर हुआ जिससे उसमें आग लग गई। घटना के समय जहाज दक्षिण दिशा में जा रहा था। हालांकि, UKMTO ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है।
बाद में एक अमेरिकी अधिकारी ने Axios को बताया कि एक दूसरे व्यापारिक जहाज को भी ईरानी मिसाइल से निशाना बनाया गया। अधिकारी के अनुसार, दोनों जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है।
ये मिसाइल हमले ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से लगातार दी जा रही धमकियों के बाद हुए हैं। गार्ड ने उन जहाजों को चेतावनी दी थी जो ओमान के तट के पास उस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे अमेरिकी सेना ने साफ किया था।
वीकेंड पर रिवोल्यूशनरी गार्ड ने समुद्री रेडियो के जरिए जहाजों को सीधी चेतावनी दी थी। उसने कहा, ”हमारी मिसाइलें और ड्रोन आप पर हमला करने के लिए तैयार हैं।”
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके सहयोगी शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बने हुए हैं।
LNG टैंकर को बनाया निशाना
स्ट्रेट ऑफ होमुज में हुए हमलों में एक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टैंकर के भी निशाना बनने की खबर है। यह जहाज अल रेकय्यात (Al Rekayyat) बताया जा रहा है जिसका स्वामित्व और संचालन कतर की शिपिंग कंपनी नाकिलात (Nakilat) के पास है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) को मिली एक ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, मंगलवार तड़के पास में खड़े एक अन्य जहाज के चालक दल ने समुद्री VHF रेडियो पर अल रेकय्यात से आपात संदेश सुना। संदेश में बताया गया कि जहाज के बाएं हिस्से (पोर्ट साइड) पर इंजन रूम के ऊपर हमला हुआ है।
इमरजेंसी मैसेज में कहा गया, ”इंजन रूम में आग लग गई है और धुआं भर गया है। अभी और नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता। सभी चालक दल सुरक्षित हैं और स्टारबोर्ड (दाएं हिस्से) पर एकत्र हैं।”
हमले के समय यह टैंकर ओमान की खाड़ी में होर्मुज के मुहाने पर मौजूद था। ऑडियो रिकॉर्डिंग में जहाज की लोकेशन की स्पष्ट पहचान की गई थी। LSEG के डेटा के अनुसार, इस जहाज से 18 जून के बाद GPS सिग्नल प्रसारित नहीं हुए हैं।
अमेरिका दे सकता है सैन्य जवाब
इन हमलों के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज में तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ताजा हमलों के बाद सैन्य प्रतिक्रिया की स्थिति बन सकती है।
संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका ईरानी ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
तेल बाजार पर फिर संकट
होर्मुज जलमार्ग में हुए ताजा हमले ऐसे समय हुए हैं जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी थी। हाल के दिनों में हर दिन करीब 30 से 60 जहाज इस जलमार्ग से गुजर रहे थे।
पिछले महीने एक मालवाहक जहाज और एक तेल टैंकर पर हुए दो अलग-अलग हमलों के बावजूद शिपिंग कंपनियां इस रास्ते का इस्तेमाल जारी रखे हुए थीं। इस बीच, तेल की कीमतों में भी गिरावट शुरू हो गई थी। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी जो चार महीनों में सबसे निचला स्तर था।
ताजा हमले से कुछ घंटे पहले ही दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों ने बाजार को स्थिर रखने की कोशिश की थी। वीकेंड पर OPEC+ देशों ने अगस्त से धीरे-धीरे तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई थी ताकि सप्लाई की कमी को कम किया जा सके।
वहीं सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने एशियाई खरीदारों के लिए अपने अरब लाइट क्रूड की कीमत में बड़ी कटौती की। कंपनी ने कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की जिसके बाद यह 1.50 डॉलर की छूट पर आ गया।
इस कदम ने कई तेल कारोबारियों को पहले हुए तेल मूल्य युद्धों की याद दिला दी। OPEC+ और सऊदी अरामको के फैसलों का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त तेल उपलब्ध रखना और कीमतों को तेजी से बढ़ने से रोकना था। लेकिन होर्मुज के पास बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने इन प्रयासों पर खतरा पैदा कर दिया है।
