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INX Media Case: पूर्व FM पी.चिदंबरम को झटका, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने पूर्व वित्त मंत्री को राहत देने से साफ इन्कार कर दिया। वह बोले, "दोनों याचिकाएं (सीबीआई और ईडी मामले में) खारिज की जाती हैं।" इसी बीच, शाम को उनके घर सीबीआई का दस्ता भी पहुंचा, पर वहां टीम को चिदंबरम नहीं मिले।

Author नई दिल्ली | Updated: August 20, 2019 9:48 PM
पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः रोहित जैन पारस)

INX Media Case में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम को तगड़ा झटका लगा है। मंगलवार (20 अगस्त, 2019) को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धनशोधन के मामलों में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने पूर्व वित्त मंत्री को राहत देने से साफ इन्कार कर दिया। वह बोले, “दोनों याचिकाएं (सीबीआई और ईडी मामले में) खारिज की जाती हैं।” इसी बीच, शाम करीब सात बजे चिदंबरम के घर सीबीआई और ईडी की टीमें पहुंचीं, पर पूर्व वित्त मंत्री वहां नहीं मिले।

ताजा मामले में कोर्ट के आदेश के बाद चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील डी कृष्णन ने इसके प्रभावी होने पर तीन दिनों की रोक लगाने की गुजारिश की, जिस पर कोर्ट बोला कि वह अनुरोध पर विचार करेगा और उस पर आदेश पारित करेगा। सुनवाई के दौरान, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों ने इस आधार पर चिदंबरम की याचिका का विरोध किया कि उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है, क्योंकि पूछताछ के दौरान उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया था।

दोनों जांच एजेंसियों ने तर्क दिया था कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान, 2007 में 305 करोड़ रुपए का विदेशी कोष प्राप्त करने के लिए एक मीडिया समूह को एफआईपीबी मंजूरी दी गई थी। ईडी ने तर्क दिया कि जिन कंपनियों में धन अंतरित किए गए, वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चिदंबरम के बेटे कार्ति द्वारा नियंत्रित हैं और यह विश्वास करने का कारण है कि उनके बेटे के हस्तक्षेप पर आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी दी गई थी।

हाईकोर्ट ने 25 जुलाई, 2018 को दोनों मामलों में चिदंबरम को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी और इसे समय-समय पर बढ़ाया गया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की भूमिका 3,500 करोड़ रुपए की एयरसेल-मैक्सिस डील और आईएनएक्स मीडिया केस पर विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में थी।

यूपीए-1 सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से दो उपक्रमों को मंजूरी दी गई थी। सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गयी एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुई थीं। बाद में ईडी ने 2018 में इस संबंध में धनशोधन का मामला दर्ज किया था।

चिदंबरम की याचिका में कहा गया था कि इस मामले में ईडी की ओर से उन्हें कभी कोई समन नहीं जारी किया गया है, पर उन्हें आशंका है कि सीबीआई द्वारा उन्हें जारी समन के मद्देनजर उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश को उनकी तरफ से चुनौती देने का फैसला लिया गया है। चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी आज सुप्रीम कोर्ट गए थे, पर कोर्ट ने सुनवाई से मना कर दिया। ऐसे में अब बुधवार को उनकी अर्जी दाखिल होगी। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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