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सुब्रत राय की सहारा में जमा चार करोड़ लोगों की गाढ़ी कमाई ख़तरे में, रकम पाने के लिए निवेशक परेशान, 15 हज़ार शिकायतें

सहारा के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की शिकायत सेल उन पर गौर कर रही है और 2019 में, कंपनी ने "17000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान / नवीनीकरण किया है।"

Author Translated By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: September 4, 2020 4:28 PM
sahara fraud probe, sahara investors complaints, sahara fraud caseसुब्रत राय की सहारा में निवेशकों की पूंजी खतरे में, 15 हज़ार शिकायतें दर्ज। (file)

राजस्थान के अलवर जिले के तिजारा निवासी 50 वर्षीय कन्हैयालाल जाटव, जो पेशे से एक दर्जी हैं, ने साल 2018 में सहारा क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी लिमिटेड की एक निवेश स्कीम में रोजाना 100 रुपये का निवेश शुरू किया था। ताकि एक साल पूरा होने के बाद मार्च 2019 में उन्हें मूल धन के अलावा ब्याज के साथ अच्छी रकम मिल सके। एक साल से ज्यादा बीत गया। जाटव अनगिनत बार सहारा हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर थक चुके लेकिन उन्हें अभी तक उनकी गाढ़ी कमाई मिलती नहीं दिख रही है।

जाटव, सुब्रत रॉय सहारा के नेतृत्व में संचालित सहारा ग्रुप की कॉपरेटिव सोसायटियों के उन चार करोड़ निवेशकों में शामिल हैं, जिनकी कमाई से तैयार राशि का बही-खाता अब केंद्र सरकार के राडार पर आ चुका है। इन पर 86,673 करोड़ रुपये जमा करने के लिए निवेशकों से धोखाधड़ी करने और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। इस रकम से सहारा समूह की फर्म ऐम्बी वैली लिमिटेड में 62,643 करोड़ रुपये का गलत तरीके से निवेश का आरोप है।

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इन समितियों को नियंत्रित करने वाले केंद्रीय पंजीयक (कॉपरेटिव सोसायटीज), जो केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन आता है, को देशभर से 15,000 से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिकायतों में निवेशकों ने आरोप लगाया है कि सहारा ग्रुप की चार कॉपरेटिव सोसायटियां- हमारा इंडिया, स्टार्स मल्टीपरपज, सहारा क्रेडिट कॉपरेटिव और सहारयन यूनिवर्सल में स्कीम मैच्योर हो जाने के बाद भी उन्हें परिपक्वता राशि नहीं दी जा रही है। हालांकि, ये संख्या ग्रुप की वास्तविक परेशानी नहीं दर्शाती है।

मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में ही करीब 1000 जमाकर्ताओं ने जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज की है कि सहारा ग्रुप उनका निवेशित धन वापस नहीं कर रहा है। जिले के कलक्टर अभय वर्मा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। वर्मा ने 24 अगस्त को इन सोसायटीज के केंद्रीय पंजीयक को पत्र लिखकर तीन सोसायटी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की जांच में पाया गया कि कई निवेशकों को स्टार्स मल्टीपरपज, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव और सहारयन यूनिवर्सल द्वारा “विशाल” राशि एकत्र करने के बाद धोखा दिया गया है।

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वर्मा ने कहा, “मेरे जिले में 10,000 जमाकर्ता हैं और हमें भुगतान नहीं मिलने से जुड़ी करीब 1,000 शिकायतें मिली हैं। हमने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है, जिसमें लोगों से 15 सितंबर तक अपनी शिकायतें दर्ज करने को कहा गया है।”

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा इन शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर सहारा के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की शिकायत सेल उन पर गौर कर रही है और 2019 में, कंपनी ने “17000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान / नवीनीकरण किया है।” प्रवक्ता ने कहा कि 4 करोड़ जमाकर्ताओं में से 20,000 शिकायतें “कुल मिलाकर … कुल संतुष्ट सदस्यों का लगभग 0.005% ही हैं।” प्रवक्ता ने कहा कि 19,500 से अधिक शिकायतों को निपटा दिया गया है और बाकी “परिपक्वता दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं करने के कारण लंबित पड़ी हैं।”

ऐसा नहीं है कि सहारा ग्रुप से शिकायतें सिर्फ निवेशकों को है। सहारा के एजेंट, जो सोसायटी के लिए लोगों से पैसे जमा करते थे, ने भी रजिस्ट्रार के पास शिकायत दर्ज कराई है। रजिस्ट्रार को एक अगस्त को लिखी शिकायत में एजेंट मृत्युंजय कुमार ने आरोप लगाया है, ‘जब भी जांच एजेंसियां सोसायटी पर शिकंजा कसती रही हैं, सहारा प्रबंधन योजना का नाम और प्रकृति बदलता रहा है। वे जमाकर्ताओं की सहमति के बिना जमा पूंजी को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करते हैं।”

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