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सरकार की दलील- लोग छूट का बहुत कम उठाते हैं फायदा, इसलिए टैक्स दर कम और छूट खत्म करने पर जोर

पुरानी व्यवस्था में जहां पांच लाख तक, पांच से दस लाख तक और दस लाख रुपए से अधिक की आय पर क्रमश: पांच, 20 और 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगाने का प्रावधान है। वहीं नए ढांचे में 15 लाख रुपए तक आय के विभिन्न स्तरों पर 5, 10, 15, 20, 25 फीसदी और 30 फीसदी की दर से कर का प्रस्ताव किया गया है।

nirmala sitharamanवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, साथ में हैं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर।

2020-21 के वित्त बजट में नए निजी आयकर स्लैब और दरों को राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने सहीं ठहराया है। उन्होंने रविवार (2 फरवरी, 2020) को इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि यह ‘अनुचित प्रत्यक्ष कर व्यवस्था’ को दूर करने वाला कदम था। राजस्व सचिव ने अपने विभाग के एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि आईटी रिटर्न दाखिल करने वालों में से लगभग 92 फीसदी ने दो लाख रुपए से भी कम की छूट का फायदा उठाया। उन्होंने कहा कि 5.78 करोड़ करदाताओं में से करीब 5.3 करोड़ (91.7 फीसदी) ने दो लाख रुपए से कम की छूट का दावा किया। इसमें सेक्शन 80सी, सेक्शन 80डी और सेक्शन सीसीडी (1बी) (एनपीएस के अतिरिक्त छूट) के तहत किए गए दावे भी शामिल हैं। विभाग के विश्लेषण के मुताबिक सिर्फ 7.77 लाख करदाता यानी कुल करदाताओं के एक फीसदी से भी कम चार लाख रुपए से अधिक की छूट का दावा किया। राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने दावा किया कि नई प्रणाली न्यायसंगत हैं।

इससे पहले वित्त बजट पेश करने के एक दिन बाद यानी रविवार (2 फरवरी, 2020) को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई वैकल्पिक आयकर व्यवस्था के जटिल होने के विशेषज्ञों के दावों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इससे ‘कुछ आयवर्ग’ के करदाताओं को निश्चित तौर पर लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आयकर व्यवस्था में अचानक बदलाव से करदाताओं पर दबाव नहीं पड़े इसलिए नई व्यवस्था को वैकल्पिक रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में पेश आम बजट में नई आयकर व्यवस्था की घोषणा करते हुए कहा कि नई व्यवस्था के तहत कई तरह की छूट और कटौतियों को समाप्त किया गया है। हालांकि, सरकार ने शनिवार शाम को ही स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन कुछ छूटों और कटौतियों की सूची जारी की है, जो नई कर व्यवस्था में भी लागू रहेंगे।

उन्होंने यहां कहा, ‘कुछ स्पष्टीकरण जारी किए गए। यदि लोगों को पुरानी कर व्यवस्था की तुलना में नई व्यवस्था में अधिक कर का भुगतान करना पड़ेगा, तो मैं ऐसी कोई व्यवस्था लाती ही क्यों?’ उन्होंने नई कर व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि हो सकता है इससे सभी करदाताओं को लाभ नहीं हो, लेकिन निश्चित तौर पर ‘कुछ आयवर्ग’ में आने वाले करदाताओं को लाभ होगा। सरकार ने व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि, विशषज्ञों का मानना है कि कॉरपोरेट आयकर की तरह व्यक्तिगत आयकर के मामले में भी वैकल्पिक व्यवस्था से प्रणाली में सिर्फ जटिलता ही आएगी।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आयकर की सात स्लैब वाली नई व्यवस्था की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि नई व्यवस्था से करदाताओं पर बोझ कम होगा। पुरानी व्यवस्था में जहां पांच लाख तक, पांच से दस लाख तक और दस लाख रुपए से अधिक की आय पर क्रमश: पांच, 20 और 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगाने का प्रावधान है। वहीं नए ढांचे में 15 लाख रुपए तक आय के विभिन्न स्तरों पर 5, 10, 15, 20, 25 फीसदी और 30 फीसदी की दर से कर का प्रस्ताव किया गया है।

संवाददाताओं के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले कई सालों के दौरान जितनी सरकारें आई उन्होंने एक के बाद एक नई रियायतें इसमें जोड़ी हैं। कुल मिलाकर आयकर कानून में अब तक 120 तक छूट, रियायतें जुड़ गईं। नए करदाता इस पूरी सूची में अपनी सहूलियत के मुताबिक रियायत को तलाशते हैं।’’ नई व्यवस्था में जाने पर क्या बचत को मिलने वाला प्रोत्साहन समाप्त नहीं हो जाएगा? इस सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा, बचत करने से किसी को रोका नहीं जायेगा। उन्होंने कहा कि आप खर्च कीजिए, बचत कीजिए यह पूरी तरह आपके विवेक पर है। लेकिन पूरी व्यवस्था में सुधार लाने के बारे में सोचना होगा।’ (एजेंसी इनपुट)

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