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सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर 31 जनवरी तक बंद रहेंगी इंटरनेट सेवाएं, किसान नेता ने की भावुक अपील, ये युद्ध नहीं है

गृह मंत्रालय ने बॉर्डर इलाकों में इंटरनेट बंद करने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 29 जनवरी की रात 11 बजे से लेकर 31 जनवरी तक इंटरनेट की सुविधा बंद की गयी है।

केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में डेरा डालकर आंदोलन पर बैठे किसान। (फोटोः पीटीआई)

दिल्ली से सटे अलग अलग सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार ने 31 जनवरी तक इंटरनेट सेवा को बंद करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सिंघु , टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर 31 जनवरी तक इंटरनेट सुविधा पर रोक लगायी जा रही है। इसी बीच किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने लोगों से भावुक अपील करते हुए शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करने को कहा है। साथ ही किसान नेता ने कहा कि यह युद्ध नहीं है और हमें किसी भी हाल में इस आंदोलन को जीतकर वापिस जाना है।

गृह मंत्रालय ने बॉर्डर इलाकों में इंटरनेट बंद करने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 29 जनवरी की रात 11 बजे से लेकर 31 जनवरी तक इंटरनेट की सुविधा बंद की गयी है और साथ ही कल तक के लिए फ़ोन की सुविधा को भी ठप कर दिया गया है। इसके अलावा गाजीपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 24 भी बंद कर दिया गया है। 

इसी बीच किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि हमें किसी भी हाल में इस आंदोलन को जीतकर वापस आना है, यह आप लोगों का ही आंदोलन है। साथ ही राजेवाल ने यह भी कहा है कि अगर आपको कोई उकसाने की कोशिश भी करे तो आपको शांत ही रहना है, भावुक होकर कोई भी ऐसा काम नहीं करना है जिससे आंदोलन पर किसी भी तरह की आंच आए। आगे बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हम यहाँ कोई युद्ध लड़ने नहीं आए हैं, यह हमारा ही देश है और हमें इस कानून को वापस करवा कर ही जाना है। इसलिए हम सब की ज़िम्मेदारी है कि इस आंदोलन को शांतिपूर्वक चलाया जाए।

इस दौरान बलवीर सिंह राजेवाल ने सरकार के इंटरनेट बंद करने के फैसले की भी आलोचना की। राजेवाल ने कहा कि सरकार आंदोलनकारी किसानों को देश के लोगों से अलग करना चाहती है ताकि उनकी बातें आगे ना पहुँचाई जा सके।

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