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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017: पीएम नरेंद्र मोदी ने यूएन, 2015 और 2016 में कैसे बांधे थे योग की तारीफों के पुल, देखिए उनके भाषणों के वीडियो

International Yoga Day 2017:

International Yoga Day 2017: चीन में योग करते वीके सिंह। (फोटो-पीटीआई)

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य आयोजन को लेकर देशभर में तैयारी हो चुकी है। लेकिन दुनिया भर की नजरें कल लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में टिकी रहेंगी। क्योंकि तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कल यानि 21 जून को लखनऊ में मनाया जाएगा। इस दौरान सभा स्थल पर कई राजनेता, ब्यूरोक्रेट्स और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 55,000 लोगों के साथ योग के विभिन्न आसन करेंगे। वहीं सुरक्षा के लिहाज से यहां व्यापक बंदोबस्त किये गये हैं, जहां कमांडो के साथ ही अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

पीएम नरेंद्र मोदी रमाबाई अंबेडकर मैदान में योगा आसन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग के संवर्धन और विकास के लिये उल्लेखनीय काम करने वालों को पीएम मोदी पुरस्कार देकर सम्मानित भी करेंगे।

योग दिवस पर विपक्ष का हमला-
वहीं कुछ मायनों में इस अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम को लेकर विरोध भी किया जा रहा है। लखनऊ में आयोजित हो रहे विशाल योग कार्यक्रम को लेकर बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कहा कि भाजपा सरकार में रोजगार बिना विकास होने के कारण देश में रोजगार के अवसर अन्य क्षेत्रों में भी लगातार कम होते जा रहे हैं, परन्तु संकट के ऐसे गंभीर समय में भी भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारें लापरवाह होकर केवल ‘योग’ जैसे कार्यक्रमों पर सरकारी धन, संसाधन व समय खर्च कर रही है।

मायावती ने कहा कि ऐसे लोक कार्यक्रमों के लिये भाजपा सरकार को नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसी संस्थाओं को उत्तरदायी बनाया जाना चाहिये। आखिर आरएसएस को मिलने वाली अनेकों प्रकार की सरकारी सुविधायें व छूट आदि का लाभ समाज के सही निर्माण के कार्य में करने के बजाय केवल नफरत की बीज बोने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिये।

मायावती ने कहा कि देश के करोड़ों मेहनतकश बेसहारा, गरीब, मजदूरों, किसानों व बेरोजगारों को रोजगार दिलाकर उनके परिवार का पेट भरने की असली ज्वलन्त समस्या का समाधान करने में केंद्र व प्रदेश सरकारों की शक्ति, संसाधन व समय का इस्तेमाल करने की वास्तविक संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय भाजपा की मोदी सरकार सरकारी धन व संसाधन का इस्तेमाल ‘पेट भरे’ लोगों पर ही ज्यादा केंद्रित कर रही है।

योग दिवस मनाने की पीएम मोदी ने की थी पहल
उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की मांग सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी। उन्होंने 27 सितंबर 2014 को UNGA में दिए गए भाषण में इसका जिक्र किया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को यूएनजीए में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने मसौदा प्रस्ताव पेश किया। कुल 177 देशों ने इसपर सहमति जाहिर की। यह अपने आप में रिकॉर्ड था। भारत के अलावा बाकी देशों के नेताओं और अध्यात्मिक गुरुओं ने भी इसको सपोर्ट किया था। जिसमें ईशा फाउंडेशन के सदगुरु महाराज और आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रवि शंकर शामिल हैं।

मोदी ने भाषण देते हुए कहा था –
योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है। योग इंसान की सोच, काम करने का तरीका, संयम बरतना, मनुष्य और प्रकृति के बीच सद्भाव सिखाता है। यह सिर्फ कसरत नहीं है बल्कि दुनिया, प्रकृति आदि के बारे में भावनाएं पैदा करता है। हमारी जीवन शैली को बदलकर अच्छी तरह से काम करने में मदद कर सकता है। आइए हम एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में काम करें।

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