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‘पहाड़ों पर लड़ाई में चीन से मजबूत है भारतीय सेना लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी’ रक्षा विशेषज्ञ ने किया स्थिति का विश्लेषण

अमेरिका के हार्वर्ड कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्मेंट के बेलफेर सेंटर और सेंटर ऑफ न्यू अमेरिका स्टडी (CNAS), वॉशिंगटन की स्टडी में भारतीय सेना को पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा मजबूत करार दिया गया है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली/वॉशिंगटन | Updated: July 12, 2020 5:23 PM
India,China, LACभारत चीन सीमा पर तैनात भारतीय जवान।(फाइल फोटो-PTI)

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले दो महीने से ज्यादा समय से तनाव जारी है। अब दोनों देशों की बातचीत के बाद स्थिति में बदलाव आया है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन का आक्रामक रवैया बरकरार रहता तो भारत के पास उससे अपनी जमीन वापस हासिल करने के लिए युद्ध करने के अलावा कोई चारा नहीं होता। अब तक कई बार यह कहा जा चुका है कि चीनी सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना पर भारी पड़ती। हालांकि, अमेरिकी और भारतीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भारतीय सेना के अनुभव का फायदा जवानों को मिलता और वह चीनी पीएलए पर इक्कीस साबित होती।

अमेरिका के हार्वर्ड कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्मेंट के बेलफेर सेंटर और सेंटर ऑफ न्यू अमेरिका स्टडी (CNAS), वॉशिंगटन की स्टडी की मानें तो ऊंची पहाड़ियों और ठंडे वातावरण में भारतीय सेना चीनी आर्मी के मुकाबले ज्यादा मजबूत है और 2020 में दोनों सेनाओं के बीच युद्ध का नतीजा कुछ और होता।

बता दें कि भारत और चीन के बीच 1962 का युद्ध मुख्यतः 3488 किमी लंबी सीमा पर हुआ था। इसमें भारत को सबसे ज्यादा नुकसान कम ऊंचाई वाले मैदानी क्षेत्र नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (अब अरुणाचल प्रदेश) में हुआ था। यहां भारत के सबसे ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी। वहीं, लद्दाख और बाकी सैन्य क्षेत्रों में भारत ने चीन को कड़ी टक्कर दी थी।

लद्दाख में हुआ मुकाबला तो क्या होंगे नतीजे?
CNAS की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राउंड फोर्सेज यानी थल सेनाओं के मुकाबले भारत के पास पहाड़ी क्षेत्रों में काफी फायदे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के खिलाफ पहाड़ी क्षेत्रों में लड़ने और कश्मीर में लगातार ऑपरेशन में शामिल रहने के कारण भारत के पास पहाड़ी क्षेत्रों का अच्छा अनुभव है। इसके अलावा भारत ने बीते सालों में लगातार पहाड़ी क्षेत्रों पर युद्ध लड़े हैं, जबकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने 1979 में वियतनाम के बाद कहीं और युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। इस लड़ाई में भी चीन को बुरी तरह हार मिली थी।

भारत के खिलाफ मुकाबले में चीनी सेना के पास भले ही उतना अनुभव नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अपनी मिसाइलों के जरिए चीन भारत की एयरफील्ड्स को बंद करने का काम कर सकता है। हालांकि, बेलफेर की स्टडी में एक पूर्व वायुसेना अफसर के हवाले से कहा गया है कि चीन की मिसाइलें भी भारत के कठिन टारगेट को भेदने में ज्यादा से ज्यादा एक दिन तक ही सफल हो सकता है, क्योंकि इसके लिए उसे 220 मिसाइलों तक इस्तेमाल करनी होंगी। जबकि उसके पास ऊंचाई में इस्तेमाल करने लायक ज्यादा से ज्यादा सिर्फ एक हजार से 1200 मिसाइल ही मौजूद होंगी।

अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन के पास भारत के मुकाबले ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक है और यह फर्क लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि, भारत-चीन के बीच युद्ध की स्थिति पर एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी का कहना है कि भारत की हवाई और जमीनी सेना युद्ध और ऑपरेशन में शामिल रहने की वजह से मजबूत हुई है। लेकिन भारत के नेतृत्व में जोखिम से बचने और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। यही उसकी बड़ी कमजोरी है।

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