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इंटेलिजेंस रिपोर्ट: रोहिंग्या मुसलमानों को पहले राहत सामग्री पहुंचाई, अब आतंकी बनाने की फिराक में लश्कर-ए-तैयबा

फिहलाल बांग्लादेश में करीब 6 लाख 46 हजार और भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या शरण लिए हुए हैं।

पिछले वर्ष भी म्यांमार के इस प्रांत में सैन्य कार्रवाई के बाद 80,000 रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पहुंचे थे।

खुफिया सूत्रों ने सरकार को आगाह किया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा रोहिंग्या मुसलमानों को आतंकी बनाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की फिराक में है। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर का चैरिटी ग्रुप पहले ही विस्थापित और बांग्लादेश में शरण पाए रोहिंग्या मुसलमानों के बीच राहत सामग्री पहुंचाकर हमदर्दी बटोर चुका है। अब उसकी योजना है कि उन्हीं में से कुछ रोहिंग्या की भर्ती आतंकवादी के रूप में करे और उसे भारत विरोधी अभियान में लगाए। टाइम्स नाऊ के मुताबिक, खुफिया सूत्रों ने इससे संबंधित रिपोर्ट हाल ही में सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर की नजर ऐसे रोहिंग्या परिवार पर है जिसमें युवक हों।ताकि उन्हें मुकम्मल ट्रेनिंग देकर तुरंत मिशन पर लगाया जा सके।

बता दें कि आतंकी संगठन पहले से ही समाज के गरीब और बेरोजगार युवकों को टारगेट बनाते रहे हैं और उनका माइंडवाश कर आतंकी बनाते रहे हैं। इंटेलिजेंस रिपोर्ट में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को इस बात के लिए अलर्ट किया गया है कि ऐसे रोंहिग्या मुसलमान और अवांछित तत्व देश की सीमा में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए बॉर्डर पर चौकसी सघन कर दी जाय। हालांकि, भारत-बांग्लादेश सीमा से किसी आतंकी की घुसपैठ अब आसान काम नहीं है। वहां पहले से ही बीएसएफ के जवान काफी मुस्तैद हैं।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हो सकता है कि म्यांमार रोंहिग्या के सामने यह प्रस्ताव रख सकता है कि जो हिन्दू रोहिंग्या हैं, वो वापस लौट जाएं लेकिन बांग्लादेश इसका विरोध कर सकता है। बता दें कि फिलहाल करीब 400 हिन्दू रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं। म्यांमार सरकार बांग्लादेश से पहले भी कह चुकी है कि वो उन्हें वापस बुलाने को तैयार है। माना जा रहा है कि रोहिंग्या समस्या की वजह से बांग्लादेश में मंदी आई हुई है।

बता दें कि नवंबर महीने में करीब 20,000 रोहिंग्याओं ने म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में आकर शरण ली थी। मध्य दिसंबर तक इसकी संख्या घटकर 200 के करीब रह गई। फिहलाल बांग्लादेश में करीब 6 लाख 46 हजार और भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या शरण लिए हुए हैं।

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