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आरटीआई: श्रेष्ठ संस्थान का दर्जा देने के लिए एचआरडी चाहता था कड़े नियम, पीएमओ ने कहा- नहीं

श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा देने के मामले में नया खुलासा हुआ है। आरटीआई के तहत दाखिल आवेदन से प्राप्‍त जानकारी में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच कई मसलों पर मतभेद की बात सामने आई है। रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्‍टीट्यूट को श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा देने को लेकर पहले ही इसके तौर-तरीकों पर सवाल उठ चुके हैं।

Author नई दिल्‍ली | August 28, 2018 11:31 AM
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (फाइल फोटो)

श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा (इंस्‍टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) देने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत इससे जुड़ी नई जानकारी हासिल की है। इसके अनुसार, श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा देने के लिए मानक निर्धारित करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (एचआरडी) में गंभीर मतभेद थे। श्रेष्‍ठ संस्‍थानों की सूची 9 जुलाई को जारी हुई थी, लेकिन इससे पहले ही सरकार के अंदर मानकों के निर्धारण को लेकर गंभीर मतभेद थे। खासकर ऐसे शिक्षण संस्‍थानों की स्‍वायत्‍तता, वित्‍तीय मामलों और शैक्षिक प्रावधानों को लेकर एचआरडी और पीएमओ के बीच आम सहमति नहीं थी। बता दें कि एचआरडी ने 6 श्रेष्‍ठ संस्‍थानों की सूची जारी की थी, जिसमें रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्‍टीट्यूट को भी जगह दी गई थी।

सख्‍त प्रावधान चाहता था एचआरडी और वित्‍त मंत्रालय: आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, श्रेष्‍ठ शिक्षण संस्‍थान का दर्जा देने के मामले में एचआरडी और वित्‍त मंत्रालय का रुख बेहद सख्‍त था। दोनों मंत्रालय जवाबदेही, वित्‍तीय जिम्‍मेदारी, जुर्माना या अर्थदंड, जमीन की उपलब्‍धता और शैक्षिणक क्षेत्र में दक्षता के लिए बेहद कड़े प्रावधान का पक्षधर था। हालांकि, पीएमओ का रवैया इसको लेकर बिल्‍कुल अलग था। प्रधानमंत्री कार्यालय इन सब मुद्दों पर अपेक्षाकृत उदार और लचीला प्रावधान चाहता था। पीएमओ के कारण कांसेप्‍ट नोट को वापस लेना पड़ा था। इस पर दिसंबर, 2015 से सितंबर, 2016 तक दोबारा से विचार विमर्श किया गया था। श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा देने के लिए तैयार अधिकांश मसलों पर पीएमओ की राय को ही वरियता मिली थी।

क्‍वालिफिकेशन से लेकर कोर्स स्‍ट्रक्‍चर तक में मतभेद: सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी में श्रेष्‍ठ संस्‍थान का दर्जा देने के लिए तैयार अहम मसलों पर एचआरडी और पीएमओ में मतभेद थे। एचआरडी ने संस्‍थान के स्‍पॉन्‍सर के लिए क्‍वालिफिकेशन तय किए थे। इसके अनुसार, निजी शैक्षणिक संस्‍थान स्‍थापित करने वालों को या तो स्‍पॉन्‍सर या फिर किसी शिक्षण संस्‍थान के प्रमुख (वीसी या निदेशक) का तजुर्बा होना चाहिए। पीएमओ ने इस प्रावधान को संशोधित करते हुए ‘शैक्षणिक संस्‍थान के कुछ सदस्‍यों के पास शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव या विश्‍वसनीयता’ का प्रावधान जोड़ दिया था। एचआरडी ने इस पर आपत्ति जताते हुए पीएमओ को 30 जून, 2016 को पत्र लिखा था। पीएमओ ने 2 जुलाई को एचआरडी मंत्रालय को जवाबी पत्र लिखा था। इंस्‍टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का फाइनल वर्जन पीएमओ की राय को दर्शाता है। जियो इंस्‍टीट्यूट का स्‍पॉन्‍सर रिलायंस फाउंडेशन इंस्‍टीट्यूशन ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च है। रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन इसके सदस्‍य हैं। इसके अलावा जमीन, पाठ्यक्रम की संरचना में लचीलापन, फायनेंस और विनियमन की शक्तियों के मामले में भी पीएमओ की राय को ही तरजीह दी गई। हालांकि, विदेशी फैकल्‍टी की नियुक्ति जैसे कुछ मसलों पर एचआरडी की भी चली।

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