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बिना योग्यता के ही दो संस्थानों को मिला इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा, 3000 करोड़ रुपये के नेटवर्थ लिमिट नियम का हुआ उल्लंघन!

ओडिशा का कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) और तमिलनाडु का वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT), दोनों संस्थान स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों की नेट वर्थ के तय मानक को पूरा नहीं करते हैं।

Author Edited By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: March 3, 2020 8:45 AM
ugcइंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस के तहत सरकार देश में विश्व स्तर के संस्थान बनाना चाहती है।

उच्च शिक्षा के कम से कम दो निजी संस्थान, जिन्हें 2 अगस्त, 2019 को इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस का दर्जा दिया गया, वह स्टेट्स पाने के अयोग्य पाए गए हैं। इनमें ओडिशा का कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) और तमिलनाडु का वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) शामिल हैं। द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि दोनों संस्थान स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों की नेट वर्थ के तय मानक को पूरा नहीं करते हैं।

यूजीसी के नियमों के तहत इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस में शामिल किए गए संस्थानों की एक स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन होनी जरुरी है। कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शन 8 के तहत स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन एक चैरिटेबल या नॉन प्रॉफिट सोसाइटी या पब्लिक ट्रस्ट होती है।

बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस के नियमों के तहत नए इंस्टीट्यूट के स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन के पास 3000 करोड़ रुपए की नेट वर्थ होनी चाहिए, वहीं मौजूदा इंस्टीट्यूट की स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन के पास 5000 करोड़ की नेटवर्थ होनी चाहिए।

हालांकि वीआईटी और केआईआईटी, दोनों ने स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन में उनकी संपत्ति का मौजूदा बाजार भाव जैसे जमीन, बिल्डिंग आदि की नेटवर्थ को दर्शाया है। केआईआईटी ने अपनी स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन में 4 सदस्य बताए हैं, जिनकी नेटवर्थ 10,000 करोड़ रुपए दर्शायी गई है। वीआईटी ने अपनी स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन में 7 सदस्य बताए हैं।

गौरतलब है कि ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को भी वीआईटी और केआईआईटी के साथ 2 अगस्त, 2019 को ही इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस का दर्जा मिला था। ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी ने अपनी स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन की नेटवर्थ में उद्योगपति नवीन जिंदल की संपत्ति 3392 करोड़ रुपए दर्शायी है।

इसी तरह शिव नदार यूनिवर्सिटी ने भी अपनी स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन में उद्योगपति शिव नदार, उनकी पत्नी और बेटी और एचसीएल एंटरप्राइजेज की सीईओ रोशनी नदार की संपत्ति को यूनिवर्सिटी की स्पॉन्सरिंग ऑर्गेनाइजेशन में दर्शाया गया है।

बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस योजना की शुरुआत मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में की थी। इस योजना के तहत 10 सरकारी और 10 निजी संस्थानों को विश्व स्तरीय बनाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस के तौर पर चुना जाएगा।

इस योजना के तहत चुने गए संस्थानों को स्वायत्ता मिलेगी, जिसमें फीस निर्धारित करने, कोर्स की समयावधि आदि पर फैसले लेना शामिल है। विदेशी संस्थानों से सहयोग लेने की स्थिति में सरकार से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी हर सरकारी इंस्टीट्यूट को 1000 करोड़ रुपए की सहायता भी देगा।

इस योजना के तहत अभी तक सरकार ने 7 निजी और 7 सरकारी संस्थानों को इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस के तौर पर चुना है। निजी संस्थानों में VIT, KIIT, अमृता विश्व विद्यापीठम, बेंगलुरु, जामिया हमदर्द, ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी, शिव नदार यूनिवर्सिटी और सत्य भारती फाउंडेशन शामिल हैं।

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