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UP: गंगा किनारे रेत में दबाए गए शव, साफ मुकर गए प्रयागराज के IG, बोले- मामला पुराना

केपी सिंह के अनुसार, कोरोना से मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार फाफामऊ घाट पर किया गया जाता है और किसी भी शव को रेत में नहीं दफनाया गया है । सिंह ने कहा कि उन्होंने नदी किनारे गश्त के लिए पुलिसकर्मियों, जल पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को तैनात किया है।

प्रयागराज में गंगा किनारे रेत में दफनाए गए शव। फोटोृ- पीटीआई

कोरोना महामारी के कारण हो रही मौतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को जारी हुए आंकड़ों में भी 4 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज थीं. शवगृहों, कब्रिस्तानों में जगह न होने की खबरें पिछले कई दिनों से आ रही रही है। इसी बीच बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी में कई लाशें बहती हुई दिखाई दी थीं, ऐसी ही दुर्भायपूर्ण तस्वीरें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, प्रयागराज व कानपुर के गंगा घाटों पर भी देखने को मिलीं। गंगा के किनारे कई शव देखे जाने के कुछ दिनों बाद, प्रयागराज के पुलिस महानिरीक्षक (प्रयागराज रेंज) केपी सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि शवों का अंतिम संस्कार दो-तीन महीने किया गया था साथ में ये भी कहा कि परेशान करने वाली ये तस्वीरें COVID-19 के दूसरी लहर की वजह से नहीं थीं।

केपी सिंह के अनुसार, कोरोना से मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार फाफामऊ घाट पर किया गया जाता है और किसी भी शव को रेत में नहीं दफनाया गया है । सिंह ने कहा कि उन्होंने नदी किनारे गश्त के लिए पुलिसकर्मियों, जल पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को तैनात किया है। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी शव गंगा या यमुना में विसर्जित न करे । उन्होंने कहा कि टीमें चटनाग, फाफामऊ और श्रृंगवेरपुर घाटों पर चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं और कड़ी नजर रख रही है।

नदी के किनारे शवों के सामूहिक दफन के बारे में सवाल किए जाने पर आईजी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हिंदू धर्म में कई संप्रदाय दाह संस्कार की परंपरा के अलावा मोक्ष के लिए पवित्र नदियों के तट पर मृतकों को दफनाने में विश्वास करते हैं।

उन्होंने कहा कि यूपी के साथ-साथ मध्य प्रदेश और बिहार के विभिन्न हिस्सों के लोग अक्सर अपने प्रियजनों के शवों को गंगा के किनारे श्रृंगवेरपुर, चटनाग और फाफामऊ घाटों पर ले जाते हैं ताकि उन्हें उनकी परंपरा के अनुसार दफनाया या विसर्जित किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को उनकी टीमों द्वारा परामर्श दिया जाता है और दाह संस्कार करने के लिए राजी किया जाता है। उन्होंने कहा कि टीमें ऐसे लोगों को यह भी बताती हैं कि तेज हवाएं और लहरें अक्सर रेत ले जाती हैं, जिससे उनके परिवार के सदस्यों की लाशें आवारा जानवर खा जाते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी टीम उन लोगों की भी मदद कर रही है जिनके पास अंतिम संस्कार के लिए धन नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में नदियों के किनारे देखे गए शवों को दो से तीन महीने पहले दफनाया गया था।

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