राजधानी दिल्ली में पानी का संकट गहराता जा रहा है। यमुना पर बने वजीराबाद तालाब का जलस्तर लगातार गिर रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने हरियाणा से मदद मांगी है। दिल्ली सरकार चाहती है कि हरियाणा अगले 4 हफ्तों के लिए अतिरिक्त पानी दे। राज्य सरकार का कहना है कि अगर अतिरिक्त पानी नहीं मिला, तो राजधानी में पानी की सप्लाई और घटानी पड़ सकती है।
एक सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मार्च, अप्रैल और मई में स्थिति को संभाल लिया गया था, लेकिन मुख्य समस्या जून की है। अधिकारी के मुताबिक अगर अतिरिक्त पानी नहीं मिला तो पानी की सप्लाई में कटौती करनी पड़ सकती है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारियों के अनुसार स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सोमवार को वजीराबाद तालाब का जलस्तर 668.7 फीट दर्ज किया गया जबकि सामान्य संचालन के लिए 674.5 फीट पानी होना जरूरी है। यानी जलस्तर सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच चुका है।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पर पड़ने लगा असर
इस गिरते जलस्तर का असर दिल्ली के बड़े वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पर भी दिखने लगा है। वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी का उत्पादन 34% तक घट चुका है। राजधानी के बाकी कई प्लांट्स भी करीब 10% कम क्षमता पर चल रहे हैं। सिर्फ सोनिया विहार और भागीरथी प्लांट ही फिलहाल सामान्य तरीके से काम कर पा रहे हैं। दिल्ली सरकार के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जलस्तर गिरने से सबसे ज्यादा असर चंद्रावल और वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पर पड़ा है।
अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि कुछ दिनों के लिए पानी की सप्लाई धीमी हो सकती है। लोगों पर असर कम करने के लिए हैदरपुर नहर सिस्टम से पानी डायवर्ट किया गया है।
दिल्ली में हर साल क्यों संकट?
वर्तमान संकट का एक बड़ा कारण यह भी है कि पानी के ट्रांसमिशन के दौरान करीब 800 क्यूसेक पानी बर्बाद हो जाता है। इसी वजह से एक समानांतर कैरियर सिस्टम बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन 700 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो पाया है और पिछले तीन साल से लटका हुआ है। हरियाणा सरकार के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह प्रोजेक्ट काफी पहले पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक अधूरा है। सूत्र के मुताबिक, अगर हरियाणा के जगाधरी से मुनक तक समानांतर चैनल तैयार हो गया होता तो मौजूदा संकट इतना गंभीर नहीं होता।
हरियाणा के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पीने के पानी को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन दिल्ली को अपने नेटवर्क में सुधार करने की जरूरत है। अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली के आर्थिक सर्वे में भी करीब 20% ट्रांसमिशन लॉस की बात कही गई है।
जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली को हरियाणा, भाखड़ा और यमुना सिस्टम से करीब 1,050 क्यूसेक पानी मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगर अतिरिक्त 250 क्यूसेक पानी और मिल जाए तो मौजूदा संकट काफी हद तक कम हो सकता है।
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