आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। पार्टी को इस बड़े सियासी झटके के संकेत पिछले कुछ दिनों से ही मिलने लगे थे।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि पिछले हफ्ते संसद के विशेष सत्र के दौरान संदीप पाठक और अरविंद केजरीवाल के बीच एक अहम बैठक हुई थी। हालांकि उस बैठक में क्या बातचीत हुई, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, संदीप पाठक ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि पंजाब में उन्हें पहले जैसा पार्टी का समर्थन और संसाधन नहीं मिल रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि संदीप पाठक वही नेता हैं, जिन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। एक अन्य पार्टी सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “कुछ न कुछ दिक्कत जरूर थी। पिछले एक हफ्ते से हमें इसका अंदाजा होने लगा था।” सूत्रों ने यह भी दावा किया कि राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल की कुछ भाजपा नेताओं से मुलाकातें भी हुई थीं।
नेताओं के मुताबिक जब ईडी ने राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर छापेमारी की, तब स्थिति और ज्यादा साफ हो गई थी। इस बारे में एक आप नेता ने कहा, “यह कार्रवाई किसी के इशारे पर ही हुई थी।”
अब पार्टी की पहली प्राथमिकता यह है कि दिल्ली में जो 22 विधायक उनके हैं, कैसे उन्हें एकजुट रखा जाए। एक अन्य आप नेता ने यह भी दावा किया कि जिन सांसदों ने इस समय पार्टी छोड़ी है, उनमें से ज्यादातर का संबंध कारोबारी पृष्ठभूमि से है।
आम आदमी पार्टी को लगे इस झटके पर अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया आई है। अन्ना हजारे ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी (AAP) ‘सही’ रास्ते पर चलती तो राघव चड्ढा और पार्टी के छह अन्य राज्यसभा सदस्य पार्टी नहीं छोड़ते। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्हें (राघव चड्ढा और अन्य 6 राज्यसभा सांसद) कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा होगा, इसीलिए वे चले गए।
राघव के बीजेपी में जाने को लेकर अन्ना हजारे ने कहा कि यह उनकी (आप नेतृत्व की) गलती है। अगर पार्टी ने सही राह अपनाई होती, तो वे पार्टी नहीं छोड़ते। समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि राघव चड्ढा और अन्य लोगों को आप के भीतर कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा और इसीलिए उन्होंने पार्टी छोड़ी।
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