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नरेंद्र मोदी ने कश्मीर घाटी को दिखाया सपना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के लोगों से कहा कि वे उनका दुख दर्द साझा करना चाहते हैं और उन्होंने भाजपा को सरकार बनाने का ‘एक मौका’ देने की अपील की। साथ ही उन्होंने राज्य को कांग्रेस व ‘दो वंशवादी दलों’ नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी से मुक्ति दिलाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा- आपने […]

Author December 9, 2014 8:37 AM
श्रीनगर के शेरे कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के लोगों से कहा कि वे उनका दुख दर्द साझा करना चाहते हैं और उन्होंने भाजपा को सरकार बनाने का ‘एक मौका’ देने की अपील की। साथ ही उन्होंने राज्य को कांग्रेस व ‘दो वंशवादी दलों’ नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी से मुक्ति दिलाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा- आपने पिछले 30 वर्षों में कश्मीर में क्या देखा? या तो कांग्रेस की सरकार रही या पिता-पुत्र (नेशनल कांफ्रेंस) की या फिर पिता-पुत्री (पीडीपी) की सरकार रही। आपने तीनों तरह की सरकार देखी है।

मोदी ने कहा कि अपने लिए उन्होंने सब कुछ हासिल किया लेकिन आपके लिए कुछ नहीं किया। इन तीनों से एक बार मुक्ति पाइए और एक बार मुझे सेवा करने का मौका दीजिए। मैं आपके सपने को अपना सपना बनाऊंगा। मैं अपनी पूरी सरकार को आपकी सेवा में लगा दूंगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार ने जम्मू कश्मीर का सत्यानाश कर दिया है। आतंकवाद खत्म हो गया है लेकिन भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ है। हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार का खात्मा है। जब तक भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता तब तक कश्मीर में आम आदमी प्रगति नहीं कर सकता।

अपने 30 मिनट के भाषण में मोदी ने कश्मीरियों का दर्द बांटने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के सांप्रदायिक सौहार्द, मानवता और लोकतंत्र का उद्धरण दिया और राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया। घाटी में अपनी पहली चुनावी सभा में मोदी ने कहा कि कश्मीर के लोगों ने हमें काफी प्यार दिया है और हम पर विश्वास किया है। मैं इस प्यार और विश्वास को ब्याज के साथ विकास के रूप में चुकाऊंगा। मैं इस प्यार और मुझ पर दिखाए गए विश्वास के लिए मर भी सकता हूं। रैली में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने जैसे विवादास्पद मुद्दों का उन्होंने जिक्र नहीं किया।

परंपरागत कश्मीरी परिधान ‘फिरन’ पहने हुए मोदी ने वर्ष 2003 में इसी स्थान पर वाजपेयी के मशहूर भाषण का जिक्र करते हुए कहा- वाजपेयी ने अच्छी शुरुआत की। मैं इसे आगे बढ़ाने आया हूं। इसे आगे बढ़ाना और इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत के सपने को पूरा करना मेरा कर्तव्य है। ये तीन स्तंभ कश्मीर को 21वीं सदी में विकास के रास्ते पर ले जाएंगे।

इससे पहले जम्मू संभाग के सांबा में मोदी ने कहा कि एके-47 पर उंगली रखने से ज्यादा शक्तिशाली ईवीएम का बटन दबाना है।

प्रधानमंत्री घाटी में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करने से पहले सेना के बादामी बाग मुख्यालय गए और युद्ध स्मारक पर आठों सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की, जो उड़ी में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पर्यटन और शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देकर कश्मीर को नई ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते हैं और बिजली उत्पादन के लिए जल संसाधनों का दोहन करना चाहते हैं जिससे पूरा देश रोशन होगा। मोदी ने कहा कि हमें कश्मीर को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और लोग हर देश में घूमना चाहते हैं। दुनिया के लोग यहां आना चाहते हैं और बाहरी दुनिया के लोगों को देश में दिखाने के लिए कश्मीर से बेहतर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि वे डल झील को पर्यटकों से भरी हुई देखना चाहते हैं।

मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले अपनी डल झील की यात्रा को याद करते हुए कहा कि पर्यटन एक ऐसा सेक्टर है जो कम से कम निवेश में गरीबों को आजीविका मुहैया करा सकता है। उन्होंने कहा- यह वेंडरों, शिकारा वालों, आॅटोरिक्शा संचालकों, टैक्सी चालकों, होटल वालों और चाय विक्रेताओं को आजीविका मुहैया कराता है।

प्रधानमंत्री ने कहा- मैं इस कहावत को बदलना चाहता हूं कि पहाड़ के पानी और युवाओं से पहाड़ को फायदा नहीं होता। पहाड़ के पानी और युवाओं का इस्तेमाल पहाड़ को ही करना चाहिए। यह तब सही साबित होगा जब हम पानी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में करेंगे, जब छोटे बिजली घर बनाए जाएंगे, किसी भी युवक को आजीविका के लिए पहाड़ नहीं छोड़ना पड़ेगा और झुग्गियों में नहीं रहना पड़ेगा।

मोदी ने लड़कियों की शिक्षा के बारे में कहा कि उन्होंने उड़ी के उच्च विद्यालय में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं को मंजूरी दी जब स्थानीय लोगों ने बताया कि आसपास के इलाकों में इस तरह की सुविधा नहीं है। मैं चाहता हूं कि कश्मीर की बेटियां शिक्षित हों। मैंने एक बार एक अखबार में फोटो देखी। कश्मीरी बेटियां शिक्षा के लिए कोटा (राजस्थान) जाती हैं। मुझे आश्चर्य हुआ कि ये लड़कियां यहां क्यों आती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास कश्मीर में गुणवत्तापूर्ण संस्थान क्यों नहीं हैं ताकि इन बेटियों को घर नहीं छोड़ना पड़े।

 

 

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