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न्यूक्लियर पनडुब्बी अरिहंत को हुआ कितना नुकसान, सरकार ने जानकारी देने से किया इनकार

सरकार ने स्वदेश निर्मित परमाणु संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को हुए नुकसान और उसकी मरम्मत पर हुए खर्च पर जानकारी देने से इनकार करते हुए बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में यह नहीं किया जा सकता।

Author नई दिल्ली | March 28, 2018 5:55 PM
स्वदेश निर्मित परमाणु संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत

सरकार ने स्वदेश निर्मित परमाणु संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को हुए नुकसान और उसकी मरम्मत पर हुए खर्च पर जानकारी देने से इनकार करते हुए बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में यह नहीं किया जा सकता। इस तरह की खबरें हैं कि पिछले साल मानवीय त्रुटि के कारण आईएनएस अरिहंत को बहुत नुकसान हुआ था। रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने लोकसभा में बीजद सांसद पिनाकी मिश्रा के प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सूचना नहीं दी जा सकती।’ बता दें कि देश की पहली स्‍वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्‍बी आर्इएनएस अरिहंत को 2016 के अगस्‍त में गोपनीय रूप से कमीशन दे दिया गया था। दिसंबर 2014 से इसके गहन परीक्षण चल रहे थे। यह पनडुब्‍बी 83 एमडब्‍ल्‍यू प्रेशराइज्‍ड लाइट वाटर रिएक्‍टर पर काम करती है। इसके जरिए 750 और साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर तक निशाना लगाया जा सकेगा। हालांकि अमेरिका, रूस और चीन की तुलना में यह क्षमता कम है। इन देशों के पास 5000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलें (एसएलबीएम) हैं।

परमाणु संपन्‍न पनडुब्‍बी की खास बात यह होती है कि दुश्‍मन को महीनों तक पता चले बिना इससे परमाणु हमले की जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। 6 हजार टन वजनी अरिहंत हालांकि अभी तक पूरी तरह से तैनाती के लिए तैयार नहीं हैं। रक्षा मंत्रालय और नेवी की ओर से भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस रणनीतिक प्रोजेक्‍ट पर प्रधानमंत्री का दफ्तर नजर रखे हुए है। आईएनएस अरिहंत को ट्रायल के दौरान हर तरह के परीक्षण से गुजारा गया जिससे कि पानी में यह एक अहम हथियार साबित हो। हालांकि के सीरीज की सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह से इसमें लगाने में वक्‍त लगेगा। के सीरीज की मिसाइलों का नाम पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम पर रखा गया है। के-15 एसएलबीएम की रेंज 750 किलोमीटर तक है जबकि के-4 3500 किलोमीटर तक जा सकती है।

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